दुर्ग जिले के भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) के परिसर से 250 टन लौह स्क्रैप की संगठित चोरी के बहुचर्चित मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने औपचारिक रूप से जांच की कमान संभाल ली है। राज्य शासन से हरी झंडी मिलने के बाद केंद्रीय एजेंसी ने अपनी गतिविधियों को तेज कर दिया है। इस मामले की निष्पक्ष और गहराई से तह तक पहुंचने के लिए दो आईपीएस और चार डीएसपी अधिकारियों के नेतृत्व में कुल 35 सदस्यों की एक विशेष जांच टीम का गठन किया गया है। स्थानीय स्तर पर किसी भी तरह के दबाव से बचने और मामले में पूरी गोपनीयता बनाए रखने के लिए इस विशेष जांच टीम में छत्तीसगढ़ अथवा स्थानीय सीबीआई यूनिट के किसी भी अधिकारी को शामिल नहीं किया गया है।
विशेष जांच टीम का ढांचा
केंद्रीय एजेंसी की इस विशेष टीम में चार महिला पुलिस निरीक्षकों को भी शामिल किया गया है। इस बीच दुर्ग पुलिस अपनी अब तक की विवेचना से जुड़ी केस डायरी, डिजिटल साक्ष्य और सभी संबंधित कानूनी दस्तावेज केंद्रीय एजेंसी को सौंपने की पूरी तैयारी में जुट गई है। चर्चा है कि जांच टीम के कुछ सदस्यों ने पूरी गोपनीयता बरतते हुए बीएसपी परिसर का दौरा भी किया है। इन सदस्यों ने संयंत्र के विभिन्न यार्डों, निकास द्वारों और सुरक्षा तंत्र से जुड़े प्राथमिक तथ्य भी जुटा लिए हैं, हालांकि इस दौरे की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
अब तक की पुलिस कार्रवाई
दुर्ग पुलिस ने 26 मई को बीएसपी के भीतर से 250 टन लौह स्क्रैप चोरी करने वाले इस बड़े अंतरराज्यीय सिंडिकेट का पर्दाफाश किया था। बीएसपी प्रबंधन की ओर से मिली लिखित शिकायत के आधार पर पिछले चार महीनों से चल रही पुलिस विवेचना के दौरान अब तक कुल 21 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने चोरी गया लौह स्क्रैप, हाइवा, बैकहो लोडर और चेन-माउंटेड मशीनों सहित करीब 3.22 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की थी।
अवैध सिंडिकेट बेनकाब होने की उम्मीद
मामला केंद्रीय जांच एजेंसी के हाथों में आने के बाद अब इस अवैध सिंडिकेट से जुड़े कई नए और प्रभावशाली चेहरों के बेनकाब होने की संभावना बन गई है। केंद्रीय जांच एजेंसी स्क्रैप की अवैध निकासी के लिए उपयोग किए गए फर्जी गेट पास, वजन पर्चियों में की गई हेराफेरी, सुरक्षा बलों की संदिग्ध भूमिका और इस पूरे अंतरराज्यीय नेटवर्क के वित्तीय लेन-देन की बारीकी से पड़ताल करने जा रही है।