मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने विधानसभा में बजट पर चर्चा के दौरान कहा कि मैं कोई अर्थशास्त्री नहीं हूं। मैं तो डाक्टर हूं, जो लोगों की नब्ज पकड़ता हूं। प्रदेश का बजट गांव, गरीब और किसानों की नब्ज को समझने वाले अर्थशास्त्र पर आधारित है। साथ ही उन्होंने यूपीए सरकार पर निशाने साधते हुये कहा कि दिल्ली में बैठे अर्थशास्त्री देश की वित्त व्यवस्था का बंटाधार कर रहे हैं।
विधानसभा में बुधवार को बजट पेश करने के बाद बाहर पत्रकारों से बातचीत में भी उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री अर्थशास्त्री हैं, लेकिन उन्होंने देश का दिवाला निकाल दिया है। उनसे भले तो हम कम पढ़े-लिखे अच्छे हैं। कम से कम गरीबों का ख्याल तो रखते हैं।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष से कहा कि प्रजातंत्र में जनता की नब्ज जानना आवश्यक होता है। किसानों में खुशहाली आ रही है। गरीबों की झोपड़ी रोशन हो रही है। आम आदमी के जीवन में परिवर्तन आ रहा है, वह भी नक्सल समस्या और सीमित संसाधनों के बीच।
केंद्र से मिलने वाले फंड के संबंध रमन सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार राज्य को जो वित्तीय सहायता देती है, उसे टाइट फंड यानी योजनाओं में बांधकर न दे। राज्य को सीधे पैसा दे, ताकि वे अपने अनुसार विकास कार्य करा सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के खाद्य सुरक्षा अधिनियम को देशभर में लागू करना चाहिए।