कोरबा लोकसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी सरोज पांडेय चुनाव के दौरान बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के हनुमंत कथा वाचन के कार्यक्रम में आयोजनकर्ताओं के तौर पर नाम लिए जाने के बाद फंसती नजर आ रही है। निर्वाचन आयोग ने इसे आचार संहिता का उल्लंघन मानते हुए कोरबा लोकसभा क्षेत्र के मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर जिले के चिरमिरी के गोदरीपारा के लाल बहादुर शास्त्री मैदान में आयोजित पंडित धीरेंद्र शास्त्री की हनुमंत कथा का खर्चा प्रत्याशी सरोज पांडेय के चुनावी खर्च में जोड़ने का निर्णय लिया है।
कोरबा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के रिटर्निंग ऑफिसर अजीत बसंत के मुताबिक निर्वाचन आयोग की जांच के बाद कोरबा लोकसभा से भाजपा प्रत्याशी सरोज पांडेय को आचार संहिता उल्लंघन का करते पाए जाने के बाद अब बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के हनुमंत कथा के कार्यक्रम का खर्च जोड़ने का काम निर्वाचन आयोग की व्यय टीम कर रही है। 4 जून को आने वाले चुनाव परिणाम के 25 दिनों बाद प्रत्याशी सरोज पांडेय के चुनावी खर्च खाते में वह रकम जोड़ी जाएगी और अगर चुनाव खर्च की कुल रकम 95 लाख से अधिक होगी तो सरोज पांडेय 3 साल तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित हो जाएंगी।
बाबा के बयान पर ऐसे फंसी सरोज पांडेय
चिरमिरी के लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम गोदरीपारा में 26 अप्रैल को हनुमंत कथा का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के साथ प्रदेश के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा भी हेलीकॉप्टर से चिरमिरी पहुंचे थे। हनुमत कथा के समापन के दौरान पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने आयोजको के नाम का जिक्र करते हुए कोरबा लोकसभा से भाजपा प्रत्याशी सरोज पांडेय, प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल का नाम लेते हुए यह कहा था कि आयोजकों के लिए ताली बजाया जाए और वे मंच पर आए, क्योंकि उन्होंने खर्चा किया है।
कार्यक्रम स्थल की वीडियोग्राफी के आधार पर सरोज पांडेय को इस मामले में निर्वाचन आयोग ने नोटिस जारी किया था। जिसका जवाब देते हुए सरोज पांडेय ने कहा कि वे इस कार्यक्रम की आयोजक नहीं थी न ही कार्यक्रम स्थल पर भाजपा का प्रचार हो रहा था। नोटिस के जवाब में सरोज पांडेय ने जवाब दिया था पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का कोई कार्यक्रम नहीं करवाया था। लेकिन निर्वाचन आयोग द्वारा कार्यक्रम स्थल की करवाई गई वीडियोग्राफी व कांग्रेस की शिकायत के आधार व पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के कबूलनामें के आधार पर निर्वाचन आयोग ने भाजपा प्रत्याशी सरोज पांडेय के चुनावी खर्च में कार्यक्रम का खर्च जोड़ने का निर्णय लिया है।
पांच मई तक सरोज ने किए 51 लाख से ज्यादा खर्च
आपको बता दें कि कोरबा लोकसभा से भाजपा प्रत्याशी सरोज पांडेय द्वारा दिये गए खर्च ब्यौरे के आधार पर 5 मई तक 51 लाख 67 हजार 953 रुपये खर्च किए गए हैं। खर्च सीमा 90 लाख है। 43 लाख 32 हजार 47 रुपये शेष हैं, अगर धीरेंद्र शास्त्री के हनुमत कथा का खर्चा 40 लाख से ऊपर जाता है तो भाजपा प्रत्याशी तय खर्च सीमा से ज्यादा राशि खर्च करने के मामले भी फंसती नजर आएंगी। क्योंकि चिरमिरी में बागेश्वर बाबा का कार्यक्रम भव्य तौर पर आयोजित हुआ था। हेलीकॉप्टर से धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पहुंचे थे वे भव्य डोम के अलावा डोम के दोनों ओर पंडाल भी बनाया गया था।
नियमों के उल्लंघन पर यह होगा
अगर किसी प्रत्याशी ने अपना चुनाव खर्च का ब्योरा नहीं दिया व तय सीमा से ज्यादा खर्च किया तो उस पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के अनुभाग 10A में दिए प्रावधान के आधार पर कार्रवाई हो सकती है। इसके मुताबिक चुनाव आयोग उस प्रत्याशी पर तीन साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लगा सकता है। अगर कोई प्रत्याशी अपना चुनाव खर्च कम दिखाता है तो उसके खिलाफ चुनाव याचिका दायर हो सकती है।
चुनाव आयोग कम खर्च दिखने को भ्रष्ट प्रथा मानता है। मगर किसी भी नागरिक को यह साबित करना होगा कि प्रत्याशी ने अपना खर्च कम दिखाया है। अधिकतम सीमा से अधिक खर्च करना एक भ्रष्ट प्रथा है। अगर किसी प्रत्याशी ने सीमा से अधिक खर्च किया है तो उसे तीन साल तक चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराया जा सकता है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के अनुभाग 10A में इसका प्रावधन है।
इतनी है खर्च की सीमा
चुनाव में खर्च की सीमा प्रदेश के हिसाब से अलग-अलग है। सिक्किम, गोवा और अरुणाचल प्रदेश में लोकसभा चुनाव में खर्च की सीमा 75 लाख रुपये है। केंद्र शासित प्रदेशों में खर्च की यह सीमा 75 से 95 लाख रुपये तक है। बाकी अधिकांश राज्यों में प्रत्याशी 95 लाख रुपये खर्च कर सकता है।