धरमजयगढ़ वन मंडल के छाल रेंज के बंगरसूता बीट के खुदरीखार जंगल में आज तड़के एक मादा हाथी ने शावक को जन्म दिया। लगातार दो माह में यह तीसरा बेबी एलीफेंट है, जिससे क्षेत्र के ग्रामीणों में हर्ष का माहौल है।
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के हाथी प्रभावित इलाकों से एक बार फिर खुशी की खबर आई है। धरमजयगढ़ वन मंडल के छाल रेंज के बंगरसूता बीट के खुदरीखार जंगल में आज तड़के एक मादा हाथी ने शावक को जन्म दिया। लगातार दो माह में यह तीसरा बेबी एलीफेंट है, जिससे क्षेत्र के ग्रामीणों में हर्ष का माहौल है।
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गांव के ग्रामीणों के अनुसार, वर्तमान में जंगल में दो दल हाथियों के विचरण कर रहे हैं। इनमें से एक दल में 48 हाथी हैं और दूसरे दल में 9 हाथी। इसी 48 हाथियों के दल में शामिल मादा हाथी ने आज सुबह शावक को जन्म दिया। इससे पहले भी यही दल घरघोड़ा रेंज से छाल क्षेत्र में आया था और वहां एक शावक का जन्म हुआ था।
दो माह में तीन हाथियों के शावक का जन्म
20 अगस्त को धरमजयगढ़ वन मंडल के बाकारूमा रेंज के धवराभांठा बीट में एक मादा हाथी ने शावक को जन्म दिया था। इसके बाद गणेश चतुर्थी (2 सितंबर) के दिन घरघोड़ा परिक्षेत्र में एक और शावक का जन्म हुआ। अब बंगरसूता में तीसरे शावक के जन्म से ग्रामीणों में खुशी का माहौल है।
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ग्रामीणों ने माना शुभ संकेत
ग्रामीणों ने बताया कि उनका गांव हाथी प्रभावित क्षेत्र में आता है। रोजाना हाथियों से फसलों को नुकसान पहुंचता है। बीती रात भी हाथियों ने गांव के आसपास की फसलों को रौंद दिया और 10 किसानों को नुकसान उठाना पड़ा। बावजूद इसके, आज सुबह शावक के जन्म की खबर मिलते ही ग्रामीणों ने इसे शुभ संकेत मानकर खुशी जाहिर की। नवरात्रि के समय जन्मे शावक को गांव वाले सौभाग्य से जोड़कर देख रहे हैं।
वन विभाग की निगरानी
वन विभाग की टीम ने बताया कि हाथियों का यह दल हाल ही में खरसिया रेंज के काफरमार बीट से बंगरसूता पहुंचा है। फिलहाल, दल पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और किसानों की क्षति का आंकलन भी किया जा रहा है।