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CG: बिलासपुर हाईकोर्ट ने कोंडागांव कलेक्टर को दिया आदेश, याचिकाकर्ता को कराएं टॉवर के किराये का भुगतान

Wed, 22 Jan 2025 09:26 PM IST
श्याम जी. अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर

सार

याचिकाकर्ता रामसाय के द्वारा विरोध करने पर जिओ कंपनी वालों ने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद याचिकाकर्ता ने ग्राम सरपंच एवं कोटवार के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की। शिकायत का निराकरण न होने पर याचिकाकर्ता ने कलेक्टर कोंडागांव के समक्ष अपनी शिकायत प्रस्तुत की।
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बिलासपुर हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक मामले में कोंडागांव कलेक्टर को आदेश दिया है कि याचिकाकर्ता के प्रकरण को संज्ञान में लेकर मोबाइल टॉवर के किराये का भुगतान कराएं। कोर्ट ने 20 दिनों के अंदर रिलाइंस जिओ कंपनी के साथ याचिकाकर्ता के अनुबंध की प्रक्रिया पूरी करने और पिछली किराया राशि का भी भुगतान कराने को कहा है।

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याचिकाकर्ता रामसाय ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें बताया गया कि बस्तर कोंडागांव में वन अधिकार पट्टा के अंतर्गत उसको जंगल में कृषि कार्य हेतु राज्य शासन द्वारा भूमि दी गई थी। उस पट्टे की जमीन पर वह लंबे समय से कृषि कार्य करते आ रहा था। वर्ष 2023-24 में रिलांइस जिओ कंपनी ने एक बड़ा मोबाइल टॉवर (इंटर स्टेट) याचिकाकर्ता के अधिकार की वनभूमि पर पूर्व अनुमति के बिना लगा दिया। इसका कोई मुआवजा या किराया भी नहीं दिया गया। 

याचिकाकर्ता रामसाय के द्वारा विरोध करने पर जिओ कंपनी वालों ने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद याचिकाकर्ता ने ग्राम सरपंच एवं कोटवार के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की। शिकायत का निराकरण न होने पर याचिकाकर्ता ने कलेक्टर कोंडागांव के समक्ष अपनी शिकायत प्रस्तुत की। कलेक्टर ने संबंधित राजस्व निरीक्षक, हल्का पटवारी को जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का आदेश दिया। जांच के बाद पाया गया कि जिओ कंपनी के द्वारा अवैध रूप से याचिकाकर्ता रामसाय की भूमि पर टॉवर लगाया गया है।
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अनुविभागीय अधिकारी ने राजस्व प्रकरण दर्ज कर कंपनी को समंस जारी किया। जिओ प्रबंधन द्वारा अपनी उपस्थिति दर्ज नही कराई गई, जिसके बाद अनुविभागीय अधिकारी के द्वारा जमानती वारंट भी जारी किया गया। इसके बाद भी कंपनी के द्वारा कोई जवाब नही दिया और ना ही अनुविभागीय अधिकारी के समक्ष अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसके बाद अनुविभागीय अधिकारी ने 18 नवंबर 2024 को आदेश पारित किया कि कंपनी रामसाय के साथ अनुबंध कर प्रतिमाह किराया प्रदान करे। इसके बाद भी कंपनी द्वारा अनुबंध न करने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई।

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