छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भिलाई नगर निगम में पेवर ब्लॉक निर्माण कार्यों में कथित गड़बड़ियों के मामले में सात अभियंताओं को बड़ी अंतरिम राहत दी है। हाईकोर्ट के जस्टिस बीडी गुरु की एकल पीठ ने संबंधित अभियंताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई और कथित अधिक भुगतान की राशि वसूलने संबंधी निर्देशों पर रोक लगा दी है।
इसके साथ ही अदालत ने भिलाई नगर निगम के मुख्य अभियंता की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस पर भी रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव, दुर्ग कलेक्टर और भिलाई नगर निगम के संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
हाईकोर्ट में चुनौती
भिलाई नगर निगम में पदस्थ उप अभियंता अर्पित बंजारे, चंदन निर्मल, श्वेता महेश्वर, पुरुषोत्तम सिंहा, रीमा हुमने और कृष्ण कुमार जंघेल के साथ सहायक अभियंता श्वेता वर्मा ने अधिवक्ता सिबाशीष मिश्रा के माध्यम से याचिका दायर कर कार्रवाई को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी और अधिवक्ता जैनब मुस्तफा वनक ने दलीलें प्रस्तुत कीं।
वकीलों ने अदालत के सामने तर्क दिया कि जांच प्रक्रिया के दौरान अभियंताओं को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला। वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने कहा कि जब विभागीय अधिकारियों ने अनुशासनात्मक कदम उठाने और वसूली की दिशा पहले ही तय कर दी थी, तब कारण बताओ नोटिस जारी करना केवल एक औपचारिकता बनकर रह जाता है। उन्होंने इस प्रक्रिया को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत बताया।
जांच रिपोर्ट और अनियमितताओं के आरोप
यह पूरा मामला वित्तीय वर्ष 2023-24 में भिलाई नगर निगम की परियोजना शाखा के अंतर्गत कराए गए पेवर ब्लॉक निर्माण कार्यों से जुड़ा है। परियोजना शाखा ने भिलाई शहर की सड़कों, फुटपाथों और चौक-चौराहों पर पेवर ब्लॉक लगाने के कार्य कराए थे। इन निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं की शिकायतें मिलने के बाद दुर्ग कलेक्टर ने मामले की जांच कराने के निर्देश जारी किए।
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कलेक्टर के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के कार्यपालन अभियंताओं की एक संयुक्त जांच टीम बनी थी। जांच टीम ने निर्माण स्थलों पर जाकर भौतिक सत्यापन किया और नगर निगम के दस्तावेज की जांच की। संयुक्त टीम ने अपने जांच प्रतिवेदन में पाया कि माप पुस्तिका में दर्ज कार्य की मात्रा और मौके पर मिले वास्तविक निर्माण के बीच बड़ा अंतर था।
वित्तीय वसूली और कलेक्टर के निर्देश
जांच टीम ने कुल 29 अनुबंधों की जांच की थी। इनमें से 21 अनुबंधों में माप पुस्तिका की तुलना में मौके पर कम निर्माण कार्य पाया गया। जांच प्रतिवेदन में इस अंतर के आधार पर कुल 16 लाख 85 हजार 457 रुपये के अधिक भुगतान की बात सामने आई थी। इस रिपोर्ट के आधार पर दुर्ग कलेक्टर ने तीन सितंबर को भिलाई नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखकर संबंधित अभियंताओं के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने और कथित अधिक भुगतान की राशि वसूलने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। कलेक्टर के निर्देशों का पालन करते हुए मुख्य अभियंता ने सातों अभियंताओं को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
अंतरिम राहत और आगामी अदालती प्रक्रिया
हाईकोर्ट के इस आदेश से सातों अभियंताओं को फिलहाल बड़ी राहत मिली है। हालांकि अदालत का यह फैसला अंतरिम आदेश है। हाईकोर्ट ने अभी निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं या अभियंताओं की व्यक्तिगत जिम्मेदारी पर अंतिम निर्णय नहीं सुनाया है। अब राज्य सरकार और भिलाई नगर निगम के अधिकारियों द्वारा जवाब पेश किए जाने के बाद अदालत आगामी सुनवाई में मामले की आगे की स्थिति स्पष्ट करेगी।