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CG: 'शोकसभा के नाम पर पूरे दिन कोर्ट बंद नहीं हो सकते', हाईकोर्ट ने कहा- न्यायिक कार्य प्रभावित करना उचित नहीं

Mon, 03 Aug 2026 08:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिलासपुर

सार

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बार एसोसिएशन की शोकसभा के कारण पूरे दिन अदालत का कामकाज स्थगित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि श्रद्धांजलि देना सम्मानजनक परंपरा है, लेकिन इससे न्यायिक कार्य प्रभावित नहीं होना चाहिए। न्याय तक निर्बाध पहुंच संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत मौलिक अधिकार है।
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छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय - फोटो : C.G. High Court
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विस्तार
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 72 वर्षीय वृद्ध मकान मालिक की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि बार एसोसिएशन की ओर से आयोजित शोकसभा के आधार पर पूरे दिन के लिए अदालती मामलों की सुनवाई स्थगित नहीं की जा सकती। हाई कोर्ट ने कहा कि दिवंगत वकील या न्यायिक अधिकारी को श्रद्धांजलि देना एक सम्मानजनक परंपरा है, लेकिन इसकी वजह से पूरे दिन न्यायिक कार्य रोकना न्याय व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित करता है। यह आदेश जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की सिंगल बेंच ने दिया।
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मामलों की अगली तारीख तय की गई
दरअसल, रायपुर निवासी 72 वर्षीय बुजुर्ग छत्तीसगढ़ किराया नियंत्रण अधिनियम के तहत बेदखली आदेश के खिलाफ केस लड़ रहे हैं। उन्होंने हाई कोर्ट में रायपुर के किराया नियंत्रक के 2 फरवरी 2026 के आदेश को चुनौती दी थी। जिला बार एसोसिएशन की शोकसभा के कारण पूरे दिन का न्यायिक कार्य स्थगित कर सभी मामलों की अगली तारीख तय कर दी गई। याचिका में बताया गया कि शोकसभा, प्रशासनिक कार्य या पीठासीन अधिकारी की अनुपलब्धता जैसे कारणों से बार-बार मामलों को टाल दिया जाता है। इससे कानून के तहत त्वरित न्याय का मूल उद्देश्य ही समाप्त हो रहा है।

अनुपलब्धता के आधार पर कोर्ट का काम स्थगित नहीं किया जा सकता
हाई कोर्ट ने याचिका पर दिए फैसले में कहा है कि न्याय तक निर्बाध पहुंच संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का अभिन्न हिस्सा है। हाई कोर्ट ने कहा कि वकीलों की हड़ताल और कार्य बहिष्कार पहले ही अवैध घोषित किए जा चुके हैं। केवल वकीलों की अनुपलब्धता के आधार पर कोर्ट का काम स्थगित नहीं किया जा सकता। शोकसभा के नाम पर भी न्यायिक कार्य रोकना उचित नहीं है। हाई कोर्ट ने याचिका मंजूर करते हुए किराया नियंत्रक द्वारा 2 फरवरी 2026 को जारी उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके जरिए शोकसभा के कारण याचिकाकर्ता के केस की सुनवाई टाल दी गई थी।
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बता दें कि हाई कोर्ट में किसी वर्तमान या पूर्व न्यायाधीश, वरिष्ठ अधिवक्ता या महत्वपूर्ण न्यायिक हस्ती के निधन पर फुल कोर्ट रेफरेंस का आयोजन किया जाता है। शोकसभा दोपहर 3:30 बजे या 3:45 बजे आयोजित की जाती है, ताकि दिनभर का मुख्य न्यायिक कामकाज प्रभावित न हो। इस दौरान बेहद संक्षिप्त आयोजन होते हैं।
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