हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग की आपातकालीन सेवा संजीवनी 108 की गाड़ियों के बुरे हालात पर प्रकाशित खबर को संज्ञान लेकर जनहित याचिका के रूप में सुनवाई शुरू कर दी है। चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और न्यायाधीश रविन्द्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में इस मामले में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने 108 वाहनों की बदहाल स्थिति को लेकर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने पूरे राज्य में 108 वाहनों की स्थिति को लेकर के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। आज सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने अतिरिक्त महाधिवक्ता यशवंत ठाकुर से पूछा कि आपातकालीन स्थिति में अत्याधुनिक तकनीक सुविधा वाली कितनी एम्बुलेंस हैं..? इसकी जानकारी उपलब्ध कराई जाए। इस मामले में अगली सुनवाई आगामी 14 फरवरी तय की गई है।
बिलासपुर- हाइकोर्ट ने सेना की जमीन से सटी जगह में मुरूम के अनाधिकृत उत्खनन मामले में सोमवार को सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की बैंच ने इस मामले सचिव से मांगे शपथपत्र के बारे में पूछा। जिसपर खनिज विभाग द्वारा भौतिक सत्यापन और मुरूम की लोक निर्माण विभाग के द्वारा रिपोर्ट के लिए 2 सप्ताह का समय मांगा गया। दरअसल छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मुरूम खुदाई के मद्देनजर 9 जनवरी 2025 को दिए आदेश में कहा था कि सचिव, खान एवं खनिज, छत्तीसगढ़ शासन ने ऐसे सभी कॉलोनाइजरों को नोटिस जारी करने, जिन पर कथित तौर पर संबंधित भूमि से उत्खनित मुरूम का उपयोग करने का आरोप है। वहीं यह भी स्पष्ट करने कहा कि अधिकारियों द्वारा किस तरीके और तंत्र को अपनाया गया है, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि संबंधित भूमि से उत्खनित मुरूम और कॉलोनाइजरों द्वारा उपयोग की गई मुरूम अलग-अलग हैं। इस मामले में शपथपत्र पेश करने शासन का पक्ष रखने वाले अधिवक्ता ने 2 सप्ताह का समय मांगा। जिसे स्वीकार कर अगली सुनवाई 21 फरवरी को रखी गई।
पिछली सुनवाई में सचिव ने अपने शपथपत्र में कहा था कि मुरूम खुदाई मामले में 01/01/2025 को, 26/12/2024 के नोटिस का जवाब ट्रांजिट पास और अन्य प्रासंगिक दस्तावेजों के साथ प्रस्तुत किया गया था। माइनिंग इंस्पेक्टर ने भौतिक जांच की गई है और इस आशय की एक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी कि उपयोग की गई मुरुम चकरभाटा, तेलसरा क्षेत्र की मुरुम से भिन्न है। चूंकि नोटिस प्राप्तकर्ता प्रयुक्त मुरुम की वैध खरीद को संतुष्ट करने में विफल रहा, इसलिए खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21(5) एवं 23(ए) के अंतर्गत 6,88,848/- रुपए का जुर्माना लगाया गया तथा वसूली पत्र जारी किया गया है। कोर्ट ने 14 दिसंबर 2024 को बिलासपुर में एक समाचार प्रकाशित खबर में तिफरा और चकरभाटा क्षेत्र में 54 कॉलोनियां हैं, जहां अनाधिकृत रूप से खनन किए गए मुरूम का उपयोग किया गया पर संज्ञान लिया था।
इसके अलावा 25 दिसंबर 2024 को एक अन्य समाचार भी प्रकाशित खबर जिसमें शैलेश अग्रवाल और अन्य व्यक्तियों सहित कुछ नामों को उजागर किया गया था, लेकिन अधिकारियों ने केवल प्रतिवादी संख्या 10 को ही नोटिस जारी किया गया है। हाइकोर्ट ने 31 दिसंबर 2024 को बिलासपुर में रक्षा विभाग की जमीन पर खनन रोकने के बजाय रॉयल्टी बुक दे दिया, बांधा तालाब के पास खनन की मंजूरी और दूसरी जगह कर रहे खुदाई।" शीर्षक से प्रकाशित समाचार रिपोर्ट में पता चलता है कि खनन विभाग और ग्राम पंचायत के अधिकारी आपस में मिले हुए हैं और उनकी भूमिका संदिग्ध है। हाइकोर्ट ने इसके मद्देनजर 9 जनवरी 2025 को दिए आदेश में कहा कि सचिव, खान एवं खनिज, छत्तीसगढ़ शासन ने ऐसे सभी कॉलोनाइजरों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है, जिन पर कथित तौर पर संबंधित भूमि से उत्खनित मुरूम का उपयोग करने का आरोप है। वहीं यह भी स्पष्ट करने कहा कि अधिकारियों द्वारा किस तरीके और तंत्र को अपनाया गया है, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि संबंधित भूमि से उत्खनित मुरूम और कॉलोनाइजरों द्वारा उपयोग की गई मुरूम अलग-अलग हैं। इस मामले में सचिव से हलफनामा मांगा था। वहीं कोर्ट में मुरूम की जांच करने के लिए लोक निर्माण विभाग की रिपोर्ट को लेकर समय मांगा गया। इसे स्वीकार कर 21 फरवरी को रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।