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Bijapur: कबाड़ में तब्दील खड़े ई-रिक्शा, हितग्राहियों तक नहीं पहुंचा योजना का लाभ; सरकार के लाखों रुपये बर्बाद

Tue, 02 Jun 2026 04:29 PM IST
बीजापुर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर

सार

जिला पंचायत बीजापुर परिसर में वर्षों से खड़े विद्युत रिक्शा अब कबाड़ में बदल गए हैं। इन वाहनों को हितग्राहियों को स्वरोजगार देने के उद्देश्य से खरीदा गया था। लेकिन अधिकारियों की उदासीनता के कारण योजना का लाभ पात्र लोगों तक नहीं पहुंच पाया।
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कबाड़ में तब्दील खड़े ई-रिक्शा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जिला पंचायत बीजापुर परिसर में वर्षों से खड़े ई-रिक्शा अब धीरे-धीरे कबाड़ में तब्दील होते जा रहे हैं, लेकिन इन्हें लेकर जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता लगातार बनी हुई है। शासन द्वारा हितग्राहियों को स्वरोजगार उपलब्ध कराने और आजीविका को बढ़ावा देने के उद्देश्य से खरीदे गए ई-रिक्शा वितरण के इंतजार में पड़े-पड़े खराब हो गए, जबकि योजना का लाभ पात्र हितग्राहियों तक आज तक नहीं पहुंच पाया।
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जानकारी के मुताबिक, इन ई-रिक्शाओं को कई वर्ष पूर्व जिला पंचायत परिसर में लाकर रखा गया था। वितरण प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण वाहन वहीं खड़े रह गए। इस दौरान जिले में कई मुख्य कार्यपालन अधिकारी आए और स्थानांतरित हो गए, लेकिन किसी ने भी इस मामले को गंभीरता से लेकर समाधान निकालने की पहल नहीं की।
 

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लंबे समय तक खुले में पड़े रहने से अधिकांश ई-रिक्शा जंग खा चुके हैं। बैटरियां खराब हो गई हैं और कई वाहनों के पुर्जे भी क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। ऐसे में शासन द्वारा खर्च की गई लाखों रुपये की राशि पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर इन वाहनों का वितरण कर दिया जाता तो अनेक बेरोजगार युवाओं और जरूरतमंद परिवारों को रोजगार का साधन मिल सकता था। लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के कारण न तो हितग्राहियों को लाभ मिला और न ही सरकारी संपत्ति का उपयोग हो पाया।

इधर चर्चा है कि विभिन्न योजनाओं के तहत नए वाहनों की खरीद की तैयारी भी की जा रही है। ऐसे में वर्षों से अनुपयोगी पड़े ई-रिक्शाओं का मामला फिर चर्चा में आ गया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब पहले खरीदे गए वाहन ही उपयोग में नहीं आ सके तो नई खरीद का औचित्य क्या है?
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अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग इस मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हैं या फिर लाखों रुपये की यह सरकारी संपत्ति यूं ही कबाड़ में तब्दील होती रहेगी।
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