कलेक्टर संबित मिश्रा ने किया बहुभाषी शिक्षण कक्षा का शुभारंभ
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बीजापुर में नई शिक्षा नीति के तहत प्राथमिक शिक्षा को स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध कराने की दिशा में बीजापुर जिले ने एक सराहनीय कदम उठाया है। जिले के जांगला स्थित पोटा केबिन में पोड़ेम आयान नट्टा यानी "हमारा पहला कदम" के नाम से बहुभाषी शिक्षण कक्षा की शुरुआत की गई है। इस पहल के अंतर्गत गोंडी भाषा को शिक्षा का माध्यम बनाया गया है, जिससे बच्चे अब अपनी मातृभाषा में गणित और भाषा विषयों की दक्षता हासिल कर सकेंगे।
इस अभिनव पहल का शुभारंभ बीजापुर कलेक्टर संबित मिश्रा ने किया। उन्होंने कक्षा का अवलोकन कर दीवारों पर बनाई गई बाला चित्रों और गतिविधियों को ध्यानपूर्वक देखा और शिक्षण में स्थानीय भाषा के उपयोग को एक सकारात्मक बदलाव बताया।
गोंडी में ज्ञान: दीवारें बनीं शिक्षण सामग्री
पोड़ेम आयान नट्टा कक्ष की दीवारों को गोंडी भाषा में चित्रित शिक्षण सामग्री से सजाया गया है। शिक्षार्थ ट्रस्ट के तकनीकी सहयोगी मोहित देव और सुमन जैन ने बताया कि चारों दीवारों को विशेष रूप से डिजाइन किया गया है। उन्होंने बताया किएक दीवार गणितीय अवधारणाओं को सरल और रोचक तरीके से प्रस्तुत करती है। दूसरी व तीसरी दीवारें भाषा शिक्षण को आसान बनाने पर केंद्रित हैं।चौथी दीवार को बाल केंद्रित प्रयोगात्मक मॉडल के रूप में विकसित किया गया है। इस कक्षा में स्थानीय संस्कृति, बोली और जीवनशैली के अनुरूप पाठ्य सामग्री को सजाया गया है, जिससे बच्चे आत्मीयता के साथ सीख सकें।
शिक्षा से जुड़ा समाज और संस्कृति
कलेक्टर संबित मिश्रा ने इस प्रयास की सराहना करते हुए इसे जिले के अन्य गोंडी भाषी क्षेत्रों में भी लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह पहल शिक्षा को केवल विद्यालय की चारदीवारी तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उसे समुदाय और संस्कृति से जोड़ती है।एपीसी मोहम्मद जाकिर खान ने जानकारी दी कि नई शिक्षा नीति में बहुभाषी शिक्षा को प्राथमिकता दी गई है। इसका उद्देश्य बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा उनके घरेलू भाषा वातावरण में देना है, जिससे सीखना अधिक प्रभावी और स्वाभाविक हो सके। यह प्रयास नवाचार, समावेश और स्थानीय ज्ञान प्रणाली को बढ़ावा देता है।