बीजापुर में इंद्रावती टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आने वाले वन परिक्षेत्र धरमारम के भट्टिगुड़ा गांव में वर्ष 2020–2021 में हुए देवगुड़ी और चारागाह निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगने के बाद भी अब तक जांच का कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आ सका है। मामले में दो साल से जांच कार्यवाही अधर में लटकी हुई है, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश और विभाग पर अविश्वास लगातार बढ़ता जा रहा है।
भ्रष्टाचार से जुड़ा यह मामला सामने आने के बाद तत्कालीन डीएफओ गनवीर धमशील ने जांच के आदेश दिए थे। इसके तहत वर्ष 2023 में एक जांच समिति गठित की गई जिसमें एसडीओ मनोज बघेल, भैरमगढ़ अभयारण्य के रेंजर पटौदी, डिप्टी रेंजर और बीटगार्ड को शामिल किया गया। लेकिन दो वर्ष बीतने के बावजूद जांच की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। जांच टीम की अब तक की कार्यवाही महज कोंडापल्ली के सरपंच से संपर्क साधने तक सीमित रही है, जिससे ग्रामीणों में विभाग की नीयत को लेकर संदेह और भी गहरा गया है। इस दौरान यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है कि जब यह काम हुआ, तब धरमारम रेंज के प्रभारी विनोद तिवारी थे। वर्तमान में वे भोपालपटनम रेंज के रेंजर पद पर पदस्थ हैं और आगामी माह में सेवानिवृत हो रहे है। ऐसे में यह सवाल उठना लाज़िमी है कि क्या जांच की धीमी रफ्तार से किसी को बचाने की कोशिश हो रही है?
निष्पक्ष जांच पर ग्रामीणों को संशय
स्थानीय ग्रामीणों ने इस बात पर गंभीर चिंता जताई है कि जब जांच वन विभाग के ही अधिकारियों द्वारा की जा रही है, तो निष्पक्षता की उम्मीद करना व्यर्थ है। कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि विभागीय स्तर पर जानबूझकर जांच को लंबित रखा गया है।
क्या विभागीय जांच काफी है?
यह सवाल अब खुलकर उठने लगा है कि क्या विभागीय घोटालों की जांच खुद विभाग द्वारा किए जाने से निष्पक्ष न्याय संभव है? जानकारों का मानना है कि इस मामले की जांच स्वतंत्र एजेंसी या अन्य विभाग से कराई जाए ताकि निष्पक्ष जांच हो और ईमानदारी से जनता के पैसे की हिफाजत हो। बता दे कि इंद्रावती टाइगर रिजर्व जैसे संवेदनशील और जैव विविधता से भरपूर क्षेत्र में यदि भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हों, और उन पर कार्रवाई ठंडे बस्ते में डाल दी जाए, तो यह ग्रामीणों के विश्वास पर भी कुठाराघात है। अब देखना यह है कि रेंजर के सेवानिवृत्त होने से पहले यह जांच रफ्तार पकड़ती है या फिर यह भी किसी और फाइल की तरह इतिहास के पन्नों में दब कर धूल खाती रह जाएगी। जांच टीम को लीड कर रहे एसडीओ मनोज बघेल ने माना कि जांच में विलंब हुआ है। लेकिन उन्होंने आगामी 20 जून से पहले संबंधित जगह पर पहुंच कर जांच पूरी कर रिपोर्ट सौपने की बात कही हैं।