बीजापुर के गोटाईगुड़ा में ग्रामीणों ने तहसीलदार पर पेसा कानून उल्लंघन और ग्रामसभा अधिकार दबाने का आरोप लगाया। आदिवासी सामाजिक भवन के लिए सुरक्षित भूमि पर जारी नोटिस को ग्रामीणों ने गैरकानूनी बताते हुए एसडीएम को ज्ञापन सौंपा।
बीजापुर में मंगलवार को ग्राम गोटाईगुड़ा के ग्रामीणों ने उप-जिलाधिकारी भोपालपटनम को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने तहसीलदार पर पेसा कानून के उल्लंघन और ग्रामसभा के अधिकारों को कुचलने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों को डराने-धमकाने का भी आरोप लगाया।
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ज्ञापन की प्रतिलिपि राज्यपाल, मुख्य सचिव, आदिम जाति विभाग, बस्तर संभाग आयुक्त, जिला अनुसूचित जनजाति आयोग, सांसद और विधायक को भी भेजी गई। ग्रामीणों ने बताया कि ग्रामसभा ने खसरा नंबर 61/12 की 0.400 हेक्टेयर भूमि 'आदिवासी सामाजिक भवन' हेतु सुरक्षित करने का निर्णय लिया था। यह निर्णय पेसा नियम 2022 की धारा-4 के तहत वैधानिक था। इसके बावजूद तहसीलदार भोपालपटनम ने 29 अप्रैल 2026 को ग्रामसभा पदाधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया। नोटिस में इस निर्णय को “शासकीय बाधा” बताया गया। ग्रामीणों का कहना है कि यह कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 244(1) और पांचवीं अनुसूची की भावना के विपरीत है। उन्होंने आपत्ति जताई कि नोटिस में शासकीय कर्मचारी न होने के बावजूद प्रतिनिधियों पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई। सरपंच, पटेल और माटी पुजारी शासकीय कर्मचारी नहीं हैं।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने इसे प्रशासनिक तानाशाही बताते हुए तहसीलदार के विरुद्ध विभागीय जांच और निलंबन की मांग की है। उन्होंने कारण बताओ नोटिस को तत्काल निरस्त करने की भी मांग की। साथ ही अनुसूचित क्षेत्रों में पदस्थ अधिकारियों के लिए “संवैधानिक साक्षरता” कार्यशाला आयोजित करने की मांग उठाई गई। यह कार्यशाला अधिकारियों को पेसा कानून के प्रति जागरूक करेगी।
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लोकतांत्रिक विरोध की चेतावनी
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में शीघ्र न्याय नहीं मिला। तो बस्तर संभाग की ग्रामसभाएं लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगी। इस दौरान माटी पुजारी शिवराम, पटेल दशरथ और सरपंच सरिता गोटे सहित 150 से अधिक ग्रामीण उपस्थित रहे। अन्य उपस्थित लोगों में एटी शंकर, पारेट बापू, तोडेम चन्द्रैया, वासम राकेश और कोरम लक्ष्मीनारायण शामिल थे।