प्रतिबंधित भाकपा माओवादी संगठन के आठ सदस्यों, जिनमें एक महिला भी शामिल है, ने भद्राद्रि कोत्तागुडेम जिले के पुलिस अधीक्षक के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण करने वाले सभी सदस्य विभिन्न स्थानों पर सक्रिय थे और उन्होंने सरकार द्वारा पुनर्वास नीति तथा पुलिस विभाग की कल्याणकारी योजनाओं से प्रभावित होकर नक्सलवाद का रास्ता छोड़ने का निर्णय लिया।
यह आत्मसमर्पण जिला पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 81वीं व 4वीं बटालियनों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और कल्याण के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन चेयुथा के अंतर्गत हुआ। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी कैडर सुविधाओं और पुनर्वास उपायों से प्रेरित होकर मुख्यधारा में लौटे हैं। आत्मसमर्पण करने वालों नक्सलियों में वेट्टी सोमदा, पिता लखमा (30 वर्ष), निवासी: घोटी कोया, पोलमपल्ली, थाना पामेड़, मुचाकी लखमे, पत्नी वेट्टी सोमड़ा (27 वर्ष), निवासी: घोटी कोया, गुंजा पर्ती, थाना उसूर, कोयम लक्ष्मण, पिता सुखराम (23 वर्ष), निवासी: घोटी कोया, डोड्डी तुमानार, थाना गंगालूर, कोड़िया कोसा, पिता बुदुर (25 वर्ष), निवासी: घोटी कोया, डोड्डी तुमानार, थाना गंगालूर, मोडम कोसा, पिता अडुमा (30 वर्ष), निवासी: डोड्डी तुमानार, थाना गंगालूर, माड़वी नंदू, पिता भीमा (25 वर्ष), निवासी: घोटी कोया, डोड्डी तुमानार, थाना गंगालूर,कारम सोमडू, पिता गुट्टा (40 वर्ष), निवासी: घोटी कोया, डोड्डी तुमानार, थाना गंगालूर व माड़वी उरा, पिता कोसा (25 वर्ष), निवासी: घोटी कोया, डोड्डी तुमानार, थाना गंगालूर, जिला बीजापुर शामिल है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले कैडर संगठन के विभिन्न स्तरों पर कार्यरत थे, जिनमें पीपीसीएम, आईएसीएम, पार्टी सदस्य और मिलिशिया कैडर शामिल हैं। उन्होंने समाज की मुख्यधारा में लौटकर अपने परिवारों के साथ शांतिपूर्ण जीवन व्यतीत करने की इच्छा जताई है। भद्राद्रि कोत्तागुडेम पुलिस ने इस आत्मसमर्पण का स्वागत करते हुए अन्य माओवादियों से भी हिंसा का मार्ग छोड़कर विकास की धारा से जुड़ने की अपील की है।