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Bijapur: सीएम की घोषणा पर नहीं हुआ अमल, कागजों में उलझकर बंद हो गई कागज कारखाने की फाइल

Fri, 01 Sep 2023 11:59 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर

सार

चार साल पूर्व चौपाल चर्चा में बीजापुर जिले के भोपालपटनम पहुंचे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हाईस्कूल मैदान में आयोजित सभा में बांस का कागज कारखाना खोलने की घोषणा की थी।
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Bijapur News - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चार साल पूर्व चौपाल चर्चा में बीजापुर जिले के भोपालपटनम पहुंचे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हाईस्कूल मैदान में आयोजित सभा में बांस का कागज कारखाना खोलने की घोषणा की थी। सीएम की घोषणा के बाद इसकी तैयारियां जोरो पर चल रही थी। लेकिन अब इसका जिक्र कोई नहीं करता है। चौपाल कार्यक्रम में सीएम ने लगभग सौ करोड़ की लागत से कागज कारखाना बनाने की घोषणा की थी। 

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देखा जाए तो कागज का कारखाना खोलने की मांग पिछले चार दशक से ज्यादा समय से की जा रही है। महाराष्ट्र और तेलंगाना की सीमा से सटा भोपालपटनम बस्तर के पश्चिमी छोर पर बसा कस्बा है। यह इलाका बेहद पिछड़ा हुआ है। मध्यप्रदेश के जमाने में इस इलाके के कुचनूर व पेगड़ापल्ली की खदानों से कोरंडम का खनन होता था, पर बाद में वन कानूनों की वजह से वह परियोजना बंद हो गई। इसका यह भी कारण नक्सली समस्या है। 

जानकारी के मुताबिक, सीएम के कागज कारखाना खोले जाने की घोषणा के बाद जिले व राज्य के बड़े अफसरों का आना जाना लगा हुआ था। उद्योग विभाग के अफसरों ने गोल्लागुड़ा गांव के पास मर्रीगुड़ा जंगल में लगभग 100 एकड़ भूमि का चयन भी कर लिया था। जिला उद्योग विभाग से मिली जानकारी के अनुसार संसाधनों की कमी के कारण कागज कारखाने की प्रक्रिया थम गई है और राज्य से कहा गया है कि वह जगह फैक्ट्री को खोलने योग्य नहीं है। ऐसी जानकारी मिली है। जब प्रक्रिया चल रही थी तब अफसरों की हलचल जोरो पर थी। यह सब देखकर ग्रामीणों में खुशी की लहर थी। कारखाना खुलने से आवागमन रोजगार से लेकर बहुत सी सुविधाएं मिलेंगी। मगर अब यह सपना बनकर रह गया। 
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बंद पड़े हुए हैं बांस के 29 कूप
विभागीय जानकारी के मुताबिक, जिले में कुल बांस के 29 कूप हैं। जिसमे भोपालपटनम के छह कूपों में ही उत्पादन हो रहा था। मगर वह भी दो साल से बंद हैं। कागज कारखाना खोलने के लिए कच्चे माल की जिले में कमी है। इधर, चर्चाओं में यह बात हो रही है कि अगर कच्चे माल की कमी है तो दूसरे जिलों से बास को लाकर कारखाना संचालित किया जा सकता है। 

क्या कहते हैं अफसर
जिला उघोग अधिकारी एसए बिलुंग का कहना है कि संसाधनों की कमी के कारण यह प्रोजेक्ट डिले हो गया है। कच्चा माल का उत्पादन कम है। बाकी प्रक्रिया राज्य लेबल की है। क्यों कि यह बड़ा प्रोजेक्ट है।

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