बीजापुर में स्कूल शिक्षा विभाग की पहल के तहत नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के 1200 शाला त्यागी और अप्रवेशी बच्चों को पोर्टा केबिनों में प्रवेश देकर तीन माह का ब्रिज कोर्स शुरू किया जाएगा, जिससे वे दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे।
बीजापुर जिले में नक्सल प्रभावित और दूरस्थ क्षेत्रों के शाला त्यागी और अप्रवेशी बच्चों के भविष्य को नई दिशा देने की दिशा में स्कूल शिक्षा विभाग ने महत्वपूर्ण पहल की है। जिले के लगभग 1200 बालक बालिकाओं को चिन्हित कर उन्हें आवासीय पोर्टा केबिनों में प्रवेश दिलाया गया है। अब तीन माह के ब्रिज कोर्स के माध्यम से उनकी शैक्षणिक क्षमता विकसित कर उन्हें उनकी योग्यता के अनुरूप नियमित कक्षाओं में प्रवेश दिलाया जाएगा।
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कलेक्टर विश्वदीप एवं जिला पंचायत सीईओ नम्रता चौबे के निर्देशन में संचालित इस अभियान का उद्देश्य उन बच्चों को फिर से शिक्षा से जोड़ना है, जो स्कूल की सुविधा के अभाव, घरेलू जिम्मेदारियों या नक्सल प्रभावित परिस्थितियों के कारण पढ़ाई से दूर हो गए थे या कभी विद्यालय नहीं पहुंच सके।
बच्चों को विद्यालयीन वातावरण के अनुरूप तैयार करने के लिए शुरुआती दिनों में खेलकूद, चित्रकला, क्राफ्ट, नृत्य, भ्रमण और टीवी आधारित शैक्षणिक गतिविधियों का आयोजन किया गया। अब उनकी शैक्षणिक स्थिति का आकलन कर तीन माह का विशेष ब्रिज कोर्स चलाया जाएगा, जिसमें भाषा एवं गणित की बुनियादी दक्षताओं को मजबूत किया जाएगा। कोर्स पूरा होने के बाद मूल्यांकन के आधार पर बच्चों को उपयुक्त कक्षाओं में प्रवेश दिया जाएगा।
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जिला पंचायत सीईओ नम्रता चौबे ने जिला शिक्षा अधिकारी, डीएमसी, सभी खंड शिक्षा अधिकारियों, बीआरसी और संकुल समन्वयकों को निर्देश दिए हैं कि ब्रिज कोर्स से जुड़े बच्चों की नियमित उपस्थिति, गुणवत्तापूर्ण अध्ययन-अध्यापन और बेहतर भोजन व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ शिक्षा की मुख्यधारा में जुड़ सकें। जिला शिक्षा अधिकारी राजेश पांडेय ने कहा कि वर्षों बाद बड़ी संख्या में बच्चे पुनः शिक्षा व्यवस्था से जुड़ रहे हैं। इनके समग्र विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे, ताकि प्रत्येक बच्चे को बेहतर भविष्य की मजबूत नींव मिल सके।