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छत्तीसगढ़: इलाज के बाद 10 वर्षीय आर्यन की मौत, निजी क्लिनिक पर उठे सवाल; फार्मासिस्ट फरार

Fri, 09 Oct 2026 08:42 PM IST
बीजापुर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर

सार

भैरमगढ़ में 10 वर्षीय बच्चे की मौत के बाद उपचार के तरीके को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। तालानार निवासी आर्यन ओयाम की तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भैरमगढ़ में पदस्थ फार्मासिस्ट धर्मेंद्र सिंह चंदेल के घर उपचार के लिए ले गए थे।
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छात्र आर्यन व फार्मासिस्ट का निजी क्लिनिक की फ़ोटो
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विस्तार
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छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के भैरमगढ़ में 10 वर्षीय बच्चे की मौत के बाद उपचार के तरीके को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। तालानार निवासी आर्यन ओयाम की तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भैरमगढ़ में पदस्थ फार्मासिस्ट धर्मेंद्र सिंह चंदेल के घर उपचार के लिए ले गए थे। परिजनों के अनुसार, वहां उपचार के बाद बच्चे की हालत बिगड़ गई। इसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर स्थिति में रेफर किया गया। हालांकि, बच्चे की जान नहीं बचाई जा सकी।
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घटना के बाद परिवार में मातम पसरा है। वहीं, फार्मासिस्ट के निजी आवास पर उपचार किए जाने, बच्चे को दी गई दवाओं और उसकी खुराक को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि बच्चे की मौत किस चिकित्सकीय कारण से हुई। वास्तविक वजह मेडिकल रिपोर्ट और जांच के बाद ही सामने आ सकेगी।

गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचा था बच्चा
भैरमगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी बीएमओ डॉ. रमेश तिग्गा के अनुसार, 26 सितंबर की रात करीब 9:25 बजे बच्चे को अस्पताल लाया गया था। उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद उसे उच्च चिकित्सा केंद्र के लिए रेफर किया गया। उन्होंने बच्चे की स्थिति में संदिग्ध जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) की संभावना से भी इनकार नहीं किया। हालांकि, बीमारी की पुष्टि और मौत के वास्तविक कारण का पता चिकित्सकीय जांच के बाद ही चल सकेगा।
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दवाओं और उपचार की प्रक्रिया की जांच जरूरी
आर्यन की मौत के बाद उपचार के दौरान दवाओं की मात्रा और उनके इस्तेमाल को लेकर आशंकाएं जताई जा रही हैं। हालांकि, बच्चे को अधिक मात्रा में दवा दिए जाने की बात की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में यह जांच महत्वपूर्ण होगी कि बच्चे को कौन-कौन सी दवाएं दी गईं, उनकी खुराक कितनी थी और उपचार के दौरान उसकी स्वास्थ्य स्थिति कैसी थी।

मृतक के बड़े पिता के मुताबिक, आर्यन को उपचार के लिए फार्मासिस्ट धर्मेंद्र सिंह चंदेल के घर ले जाया गया था। परिजनों का मानना है कि यदि बच्चे को समय रहते बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल जाती, तो शायद उसकी जान बच सकती थी। परिवार ने घटना की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक कारण सामने लाने की मांग की है।

फार्मासिस्ट के निजी आवास पर उपचार को लेकर सवाल
धर्मेंद्र सिंह चंदेल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भैरमगढ़ में ड्रग डिस्पेंसर (फार्मासिस्ट) के पद पर पदस्थ हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, वे ड्यूटी के बाद अपने निवास पर भी मरीजों का उपचार करते हैं। आर्यन की मौत के बाद यह सवाल उठने लगा है कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थान में पदस्थ फार्मासिस्ट द्वारा निजी आवास पर किस प्रकार का उपचार किया जा रहा था और क्या इसके लिए निर्धारित नियमों का पालन किया जा रहा था।

मामले की जांच में यह स्पष्ट करना जरूरी होगा कि बच्चे को किस प्रकार का उपचार दिया गया, दवाएं किसने दीं और उपचार के दौरान निर्धारित चिकित्सकीय प्रक्रियाओं का पालन हुआ या नहीं। यदि किसी तरह की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित जिम्मेदारी तय की जा सकेगी।

सीएमएचओ बोले—जांच के बाद होगी कार्रवाई
मामले को लेकर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. बीआर पुजारी ने कहा कि यह घटना बेहद दुखद है। उन्होंने बताया कि जल्द ही मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

गांव में शोक, निष्पक्ष जांच की मांग
आर्यन की मौत के बाद तालानार के स्कूलपारा में शोक का माहौल है। परिवार और ग्रामीण इस घटना से सदमे में हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर बच्चे की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाए। साथ ही, यदि उपचार में लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

छात्र आर्यन व फार्मासिस्ट का निजी क्लिनिक की फ़ोटो

 

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