फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bijapur: साल भर में अलग-अलग बीमारियों से हुई 10 बच्चों की मौत, विधानसभा में भी गूंजा मुद्दा, व्यवस्था जस की तस

Mon, 30 Dec 2024 01:45 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर

सार

बीजापुर जिले में साल 2024 में अलग-अलग आश्रम- छात्रावास में दस बच्चों की मौत हुई हैं। आठ बच्चों की मौत बीमारी, एक की मौत का कारण आत्महत्या तो वहीं एक बच्ची की मौत जलने से हुई थी।
विज्ञापन
छत्तीसगढ़ विधानसभा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बीजापुर जिले में साल 2024 में अलग-अलग आश्रम- छात्रावास में दस बच्चों की मौत हुई हैं। आठ बच्चों की मौत बीमारी, एक की मौत का कारण आत्महत्या तो वहीं एक बच्ची की मौत जलने से हुई थी। इन बच्चों की मौत से आश्रम-छात्रावास की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इन सवालो के बाद कई दौर की जांच भी सालभर तक होती रही। लेकिन जांच बेनतीजा ही साबित हुई। दरअसल आश्रम छात्रावास में बच्चों को मिलने वाली सुविधा के साथ ही खाने-पाने की गुणवत्ता पर सवाल उठते रहे है। मौत के प्रमुख कारणों में बच्चों का बीमार होना है। उल्टी, दस्त और फूड प्वाइजनिंग जैसे कारणों से बच्चों की मौत से स्पष्ट होता है कि लापरवाही तो हुई है। अगर बच्चों को बेहतर सुविधा के साथ खानपान की अच्छी गुणवत्ता मिलती तो शायद वे सलामत होते।

विज्ञापन


पोटाकेबिन में आग लगने से हुई थी बच्ची की मौत
आवापल्ली स्थित पोटाकेबिन में 6 मार्च को आग लगने से एक बच्ची की मौत हो गई थी। इस मामले के बाद पोटाकेबिन की सुरक्षा पर सवाल खड़े हुए थे। दरअसल पोटाकेबिन में आग लगने की घटनाओं से निपटने के कोई इंतजाम नहीं हैं। उस वक्त इस संबंध में आदेश भी जारी किए गए,लेकिन आज भी पोटाकेबिन का संचालन लापरवाही के साथ हो रहा है।

पोटाकेबिन और छात्रावास का अधीक्षक बनने लगती है बोली
जिले में विपक्षी पार्टियां हमेशा आरोप लगाती रही हैं कि पोटाकेबिन और आश्रम-छात्रावास का अधीक्षक बनने के लिए जिले में बोली लगती है। एक मोटी रकम सालाना तक का तय है। इससे ही अंदाजा लगाया जा सकता है, कि आश्रम- छात्रावास में बच्चों का कितना ख्याल रखा जाता है। उनकी सेहत जिम्मेदारों के लिए कितनी महत्वपूर्ण है। बच्चों की सेहस से खिलवाड़ का सिलसिला उन्हें परोसे जाने वाले घटिया खाने से होता है। आए दिन आश्रम-छात्रावासों से ऐसी तस्वीरें सामने आती हैं जब बच्चों को गुणवत्ताहीन खाना परोसा जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


फैक्ट फाइल
जिले में ट्राइबल आश्रम 137, 51 छात्रावास 
जिले में 34 आवासीय पोटाकेबिन विद्यालय 
छात्रावास में 15000 बच्चे आश्रम 
पोटाकेबिन में 12000 से अधिक बच्चे 

जिले के इन आश्रम- छात्रावास में बच्चों की मौत हुई
■ 27 फरवरी जेवियर कुजूर 13 वर्ष 7वी का छात्र- प्री. मैट्रिक बालक छात्रावास चेरागंगी (फांसी लगाकर आत्महत्या)
■ 6 मार्च लिप्सा. 04 वर्ष आवासीय बालिका पोटाकेबिन तिम्गापुर (पोटाकेबिन में आग लगने की वजह से जलकर मौत हो गई।
■ 19 अप्रैल रजनी यालम 20 वर्ष छात्रा की ईलाज के दौरान मौत हुई तारलागुड़ा की रहने वाली थी।
■ 12 जुलाई दीक्षिता रेगा उम्र- 09 वर्ष कक्षा चौथी आवासीय बालिका पोटाकेबिन तारलागुड़ा (मलेरिया से मौत)
■ 14 जुलाई वेदिका जव्वा 4 वर्ष कभा तीसरी आवासीय बालिका पोटाकेबिन संगमपली (मलेरिया से मौत)
■ 08 अगस्त अनिता कुरसम 04 वर्ष कक्षा-दूसरी 6 कन्या आश्रम बेदरे (बुखार और उल्टी दस्त)
■ 27 सितंबर राकेश पुनम 08 वर्ष कक्षा पहली - आवासीय विद्यालय दुगईगुडा (उल्टी दस्त से)
■10 दिसंबर शिवानी उम्र माता रुकमणी कन्या आवासीय आश्रम धनोरा (फूड पाईजनिंग से मौत)
■ 11 दिसंबर विमला कवासी कक्षा- 10वीं 15वर्ष आवासीय कन्या पोटाकेबिन नेमेड (सिक लिंग पेन)
■ 16 दिसंबर टंकेश्वर नाग कक्षा चौथी आवासीय बालक स्कूल भटवाड़ा (मलेरिया से मौत)

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें