बीजापुर जिला प्रशासन का 'स्कूल वेंडे वर्राट पंडुम' अभियान ड्रॉपआउट मुक्त जिला बनाने की पहल है। 600 सर्वे टीमें 586 गांवों में घर-घर जाकर बच्चों को स्कूल से जोड़ने के लिए काम कर रही हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में नई शुरुआत करते हुए बीजापुर जिला प्रशासन ने 'स्कूल वेंडे वर्राट पंडुम' अभियान की शुरुआत की है। इस अनूठी पहल का उद्देश्य जिले को ड्रॉपआउट मुक्त बनाना है, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। कलेक्टर संबित मिश्रा के मार्गदर्शन में शुरू हुए इस अभियान के अंतर्गत जिले के 586 गांवों में डोर-टू-डोर सर्वे किया जा रहा है।
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इस सर्वे के लिए करीब 2200 सदस्यों वाली 600 सर्वे टीमों का गठन कर उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। ये टीमें घर-घर जाकर बच्चों की शैक्षिक स्थिति की जानकारी इकट्ठा कर रही हैं, ताकि उन्हें दोबारा स्कूल से जोड़ा जा सके। सर्वे का कार्य 8 मई से शुरू होकर 20 मई तक चलेगा। इस दौरान हर घर में जाकर बच्चों की स्थिति, ड्रॉपआउट या नामांकन न होने के कारणों को चिन्हित किया जा रहा है। 23 प्रमुख कारणों को इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है। जैसे घरेलू जिम्मेदारियां, आर्थिक कठिनाइयां, दिव्यांगता, बाल विवाह, पलायन आदि।
इस महाअभियान में शिक्षा विभाग, पंचायत विभाग, महिला एवं बाल विकास, बीजा दुतीर और शिक्षार्थ ट्रस्ट जैसे संगठनों का सक्रिय सहयोग मिल रहा है। सर्वे के बाद डाटा एंट्री और समीक्षा कर व्यापक कार्ययोजना बनाई जाएगी, जिसके तहत बच्चों को पुनः स्कूलों में नामांकित किया जाएगा। 'हर बच्चा पढ़े, आगे बढ़े' के संकल्प के साथ बीजापुर जिला शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।