11 मार्च शाम को रायपुर से अमरकंटक एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे यात्रियों को एक अजीब और मानसिक रूप से परेशानी देने वाली स्थिति का सामना करना पड़ा। रायपुर से ट्रेन छूटने के बाद, आरपीएफ के एक आरक्षक, जो खुद को रेल पर्यवेक्षक बताकर यात्रियों से टिकट जांचने लगा, ने न केवल उन्हें परेशान किया बल्कि धमकियां भी दीं। इस घटना से यात्रियों में भय का माहौल बन गया।
आरक्षक सिन्हा ने यात्रियों को भविष्य में ट्रेन में न चढ़ने की धमकी दी और उनका व्यवहार अपमानजनक व अभद्र था। खासकर उस समय यात्रा कर रहे शहर के वरिष्ठ नागरिक और जनप्रतिनिधि इस घटनाक्रम के गवाह बने, जिनका कहना था कि इस तरह की बदतमीजी पर रेलवे को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। यात्रियों का कहना है कि रेलवे प्रशासन को ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह के अप्रिय घटनाएं न हों। साथ ही, उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या रेलवे इस घटना पर कार्रवाई करेगी या इसे नजरअंदाज कर देगी।
जब इस मामले में रेलवे के अधिकारियों से प्रतिक्रिया ली गई, तो सभी ने इस बारे में कुछ भी कहने से इनकार किया और कहा कि वे इस संबंध में भी कहने के लिए अधिकृत नहीं हैं। इस घटना ने एक बार फिर से रेलवे के सुरक्षा व्यवस्था और कर्मचारियों के आचरण पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखने की बात होगी कि रेलवे प्रशासन इस पर क्या कार्रवाई करता है।