फिल्म देख तो आया आइडिया
मातृशक्ति सुरक्षा मंच के सदस्य शरद ठाकुर एकांत पवार ने बताया कि जब हमने द केरल स्टोरी फिल्म देखी तो हमें एहसास हुआ कि इस फिल्म से हमारे समाज, हमारे शहर, हमारे जिले की लड़कियों को जोड़ने की आवश्यकता है क्योंकि सामान्य परिवार की लड़कियां भी इस फिल्म को देख पाने में असमर्थ रहती है। इसलिए हम सब महिला और पुरुषों ने यह निर्णय लिया कि जितनी हमारी क्षमता है। उतनी हम लड़कियों को फिल्म मुफ्त में दिखाएंगे। दोपहर 3:00 से यह मुफ्त की स्क्रीनिंग शुरू कराई गई। लड़कियों का उत्साह देखने को मिला। पूरा हाउसफुल रहा। जिसके बाद और भी लड़कियां सैकड़ों की संख्या में पहुंचीं। और हमने उन्हें सहयोग करने का पूरा प्रयास किया।
परंपरा संस्कृति को बचाने की जरूरत
फिल्म देखकर निकलने वाली महिला नीतू सोनवानी ने बताया कि हमें अब खुलकर सामने आने की जरूरत है। ऐसी शक्तियों से बचकर रहना चाहिए, जो हमारी सभ्यता, संस्कृति और हमारी युवतियों को बिगाड़ने की कोशिश करते हैं। इसी के साथ ही जिला पंचायत की सदस्य कीर्तिका साहू ने कहा कि हम सबको अपने परिवार के प्रति सजग रहने की आवश्यकता है। बेटियों से खुलकर बात करनी चाहिए। बेटियों को इन सब विषयों पर जागरूक करना चाहिए। तभी हम अपनी सभ्यता को बचाने में सक्षम रहेंगे। इसी के साथ ही जया ठाकुर ने कहा कि फिल्म काफी अच्छी थी। हमें काफी कुछ सीखने को मिला। हमने देखा कि कैसे हम किसी के ऊपर यूं ही विश्वास न करें। लीसा पनपालिया ने बताया कि किसी अनजान पर विश्वास करने का क्या नतीजा होता है। हमने फिल्म में देखा है। कैसे प्रेम जाल में फंसा कर हमारी तीन बहनों के साथ कितना गलत किया गया है। यह भी दिख रहा है।
माइंड रखें एक्टिव
यहां पर कुछ लड़कियों और महिलाओं ने बताया कि अपने माइंड को एक्टिव रखना चाहिए। यदि हम पढ़ने जाते हैं तो हमारा फोकस पूरी तरह पढ़ाई पर होनी चाहिए। विवेक पाटीदार ने भी हमसे बात की। उन्होंने कहा कि समाज को बचाने की आवश्यकता है। हमारे देश की हमारे महिलाओं को, हमारी बहनों को, अपने लक्ष्य पर फोकस रखना चाहिए। ऐसी चीजों से बचें, जो हमारा ध्यान भटका रही है। मुझे लगा कि हमें इस फिल्म को दिखाना चाहिए तो मैंने भी इसमें आगे आकर सहयोग किया है। वहीं बालोद शहर निवासी एकांत पवार ने कहा कि फिल्म के माध्यम से यह देखने को मिल रहा है कि अन्य राज्यों में हमारे देश में किस तरह की घटनाएं घटती है, क्या हमारी बेटियों और बहनों के साथ ऐसा हो सकता है। इन सभी बातों को ध्यान में रखना चाहिए। शायद हमें ऐसा लग रहा है कि हम सब ने मिलकर, जो प्रयास किया है। वह सफल हुआ है।
काफी एक्टिव दिखी लड़कियां और महिलाएं
थिएटर से निकलने के बाद किसी भी लड़की या महिला के चेहरे पर ऐसा स्वभाव नहीं दिखा जैसे फिल्म देखने के बाद उन्हें बोर लग रहा हो या फिर फिल्म बकवास हो। हमने फिल्म को लेकर जितनी भी लड़कियों से, महिलाओं से चर्चा की। सभी ने फिल्म को अच्छा ही बताया। सभी के माइंड काफी एक्टिव देखने को मिले। 3 बजे शो हाउसफुल रहा। उसके बाद 6 के शो को लेकर मुफ्त में टिकट कटाने का सिलसिला जारी रहा। आज कुछ फ्री स्क्रीनिंग का फायदा सैकड़ों लड़कियों और महिलाओं ने लिया है।