बालोद में बच्चों को स्कूल जाने के लिए प्रेरित करने 90 के दशक में एक कर्ण प्रिय संगीत गूंजता था जो की "स्कूल चले हम" शीर्षक के साथ आता था लेकिन आज शिक्षा व्यवस्था इतनी बढ़कर होती जा रही है कि पलक स्वयं अपने बच्चों को स्कूल भेजना नहीं चाहते जी हां हम बात कर रहे हैं बालोद जिले के ग्राम कुचेरा के प्राथमिक स्कूल की जो की पूरी तरह जर्जर हो चुका है कुछ समय पहले प्लास्टर गिरने से इस विद्यालय में बच्चे गंभीर रूप से घायल भी हुए थे बच्चों को यहां से शिफ्ट तो किया गया लेकिन आज प्राथमिक शाला के पांच कक्षाएं केवल दो कमरों में संचालित है जिसमें एक कमरे में कक्षा पहली से तीसरी तक तो वहीं दूसरे कमरे में कक्षा चौथी और कक्षा पांचवी संचालित है अब पालक इतने परेशान हो चुके हैं कि जब स्कूल खुलेगा तो वह अपने बच्चों को स्कूल ही नहीं भेजना चाहते वहीं पूरे मसले पर विकासखंड चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि मांग पत्र सरकार को भेजा गया है।
बालोद जिले के गुरूर ब्लॉक के ग्राम कोचेरा में प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक शाला संचालित है लेकिन यहां पर सबसे बड़ी बात यह है कि जो बच्चों का पढ़ाई का पहला स्टेज होता है उन्हें कक्षाओं में ही बच्चों को संघर्ष करना पड़ रहा है अभी विद्यालय बंद है गर्मी की छुट्टियां लगी हुई है और इन्हीं गर्मियों की छुट्टियों के बीच पलकों ने अपने बच्चों को स्कूल ना भेजने का निर्णय कर लिया है उनका कहना है कि स्कूल खुलने से पहले प्रशासन यहां पर उचित व्यवस्था बनाएं अन्यथा वे बड़ा आंदोलन करेंगे या फिर अपने बच्चों को विद्यालय ही नहीं भेजेंगे।
शासन - प्रशासन को करा चुके अवगत
गांव के अध्यक्ष डामन लाल साहू ने बताया कि विद्यालय काफी झज्जर हो चुका है सरकार तो बदल गई परंतु नहीं बदला तो स्कूल का खस्ता हालत उन्होंने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री तत्कालीन कलेक्टर सभी को इन समस्याओं से अवगत कराया जा चुका है लेकिन अब तक किसी तरह का कोई परिणाम नहीं निकला है अब सरकार बदल गई है तो उम्मीद है कि जल्द ही मामले का निराकरण होगा लेकिन अब तक किसी तरह का कोई निराकरण नहीं हो पाया है जिसके कारण अब हमें बड़ा कदम उठाना पड़ेगा, गांव पंचायत के सरपंच डोमन लाल साहू ने बताया कि विद्यालय काफी जर्जर हो चुका है और हम लगातार इसके नव निर्माण की मांग कर रहे हैं अगर निर्माण नहीं हुआ तो हम सब ग्रामीण मिलकर अपने बच्चों को विद्यालय नहीं भेजेंगे।
दो कमरे में लग रही 5 कक्षाएं
विद्यायल के बच्चों की मां कुलेश्वरी पडौती ने बताया कि दो कमरों में पांच कक्षाएं संचालित हो रही है बच्चों को भविष्य अंधकार में है यह उनके पढ़ाई की पहली सीढ़ी है यदि प्राथमिक में ही उन्हें बेहतर शिक्षा नहीं मिल पाएगी तो आगे हुए भविष्य में क्या करेंगे उन्होंने कहा कि हम सब आप अपने बच्चों को विद्यालय नहीं भेजेंगे गर्मी की छुट्टी में यह मांग करने का मतलब यह है कि प्रशासन कम से कम बच्चों के लिए कुछ तो बेहतर करें हमने सुशासन त्यौहार में भी आवेदन लगाया है।