बालोद के सीमार्ट में हरेली त्योहार पर गेड़ी खरीदने पहुंचे लोग।
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छत्तीसगढ़ी संस्कृति का पहला त्योहार हरेली आने वाला है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली सरकार में जिस तरह से छत्तीसगढ़ी त्योहारों को तवज्जो दी गई उसका अब परिणाम दिखने लगा है। पहली बार गेड़ी बाजार में बिकने के लिए आई है। इसे शहर के हाईटेक स्टोर सी-मार्ट में बेचा जा रहा है। कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल मंशा के अनुरूप सी-मार्ट में इस बार हरेली तिहार पर आम-नागरिकों के लिए गेड़ी विक्रय के लिए उपलब्ध कराई गई है।
हरेली पर गेड़ी चढ़ने की परंपरा
हरेली तिहार के साथ गेड़ी चढ़ने की परंपरा अभिन्न रूप से जुड़ी हुई है। त्योहार के दिन ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग सभी परिवारों द्वारा गेड़ी का निर्माण किया जाता है। परिवार के बच्चे और युवा गेड़ी का जमकर आनंद लेते हैं। गेड़ी चढ़कर ग्रामीण-जन और कृषक-समाज वर्षा ऋतु का स्वागत करता है। वर्षा ऋतु में के दौरान गांवों में सभी तरफ कीचड़ होता है, लेकिन गेड़ी चढ़कर कहीं भी आसानी से आया-जाया जा सकता है।
बांस से बनाई जाती है गेड़ी
गेड़ी बांस से बनाई जाती है। दो बांस में बराबरी दूरी पर कील लगाई जाती है। एक और बांस के टुकड़ों को बीच से फाड़कर उसे दो भागों में बांटा जाता है। उसे रस्सी से फिर से जोड़कर दो पउवा बनाया जाता है। यह पउवा असल में पैरदान होता है, जिसे लंबाई में पहले काटे गए दो बांसों में लगाई गई कीलों के ऊपर बांध दिया जाता है। गेड़ी पर चलते समय रच-रच की ध्वनि निकलती है, जो वातावरण को और आनंददायक बना देती है।
मुख्यमंत्री ने की तारीफ
बालोद जिला प्रशासन के इस पहल की छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी जमकर तारीफ की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बहुत ही अच्छी पहल है और इसके लिए हमारे जिला प्रशासन द्वारा पूरी मेहनत की जा रही है। महिला स्व सहायता समूहों के साथ-साथ बांसोड़ परिवार भी है जो की बांस से बनी चीजों का निर्माण कर अपना जीवन यापन करते हैं। यह एक अपने आप में अनोखी शुरुआत है। आने वाले हरेली पर्व में प्रशासन द्वारा बनाए गए वीडियो का उत्साह देखते ही बनेगा।
पहली बार बाजार में आया गेड़ी
सी-मार्ट के कर्मचारियों ने बताया कि लोग देखने आते हैं और खरीद कर भी जाते हैं। इसके साथ-साथ मार्ट की अन्य सामग्रियां भी खरीदते हैं। विवेकानंद दिल्लीवार ने बताया कि इसकी लागत काफी ज्यादा है परंतु यहां अनुमानित मध्य दर पर नो प्रॉफिट नो लॉस के साथ इसका विक्रय किया जा रहा है। यह छत्तीसगढ़ परंपरा को सहने का एक सशक्त माध्यम है। छत्तीसगढ़ के पारंपरिक त्योहार की ओर लोग आकर्षित हो रहे हैं।