बालोद जिले में तांदुला नदी के किनारे दशकों से खेती कर रहे किसानों के सामने अचानक आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। तहसील प्रशासन ने शाम 4 बजे बेदखली का नोटिस थमा दिया है। इसमें शुक्रवार सुबह तक जमीन खाली करने का सख्त निर्देश दिया गया है, अन्यथा खेतों को नेस्तनाबूत करने की चेतावनी दी गई है। इस फरमान से किसान सहमे हुए हैं।
कलेक्ट्रेट पहुंचे किसान, जिम्मेदार अधिकारी नदारद
प्रशासनिक आदेश से घबराए किसान अपनी गुहार लेकर जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे। हालांकि, देर शाम होने के कारण कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं था। किसान अपनी पीड़ा बताने के लिए भटकते रहे। प्रभावित किसानों का कहना है कि वे पिछले 60 वर्षों, यानी तीन पीढ़ियों से इस जमीन पर खेती कर रहे हैं और यही उनकी आय का एकमात्र साधन है।
पूंजी डूबने का खतरा, खेतों में लहलहा रही है उम्मीद
किसानों ने बताया कि तांदुला नदी के किनारे खेतों में फसलें लगाई जा चुकी हैं। जुताई-बुआई का काम अंतिम चरण में है। किसानों ने अपनी जमा-पूंजी बीज, खाद और मजदूरी पर खर्च कर दी है। ऐसे में अचानक बेदखली की कार्रवाई उन्हें कर्ज और भुखमरी की ओर धकेल सकती है।
प्रशासन के रवैये पर सवाल
कृषक लोचन लाल साहू ने प्रशासन के इस कदम पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि वर्षों पहले न्यायालय में मामला जाने पर प्रशासन ने ही कहा था कि पट्टे की आवश्यकता नहीं है और वे कृषि कार्य कर जीवन यापन कर सकते हैं। यदि पहले सूचित किया जाता तो वे फसल की बुआई नहीं करते। अब जब पैसा लग चुका है, तब उन्हें उजाड़ने की तैयारी है। बुजुर्ग कृषक सुरुज बाई ने भावुक होकर कहा कि यह उनकी तीसरी पीढ़ी है जो यहां खेती कर रही है, और ऐसे अचानक आदेश उनकी समझ से परे हैं।