राजधानी रायपुर में सूदखोरी, रंगदारी और अवैध हथियार रखने के आरोपों में पकड़े गए हिस्ट्रीशीटर वीरेंद्र सिंह तोमर की गिरफ्तारी और उससे पहले 9 नवम्बर को उसके साथ निकाले गए जुलूस के तरीके ने स्थानीय माहौल गर्म कर दिया है।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सूदखोरी, रंगदारी और अवैध हथियार रखने के आरोपों में पकड़े गए हिस्ट्रीशीटर वीरेंद्र सिंह तोमर की गिरफ्तारी और उससे पहले 9 नवम्बर को उसके साथ निकाले गए जुलूस के तरीके ने स्थानीय माहौल गर्म कर दिया है। करणी सेना ने इस घटना को न केवल अनुचित बताया बल्कि बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की तैयारी का एलान भी किया है।
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पुलिस ने तोमर को 10 नवम्बर को अदालत में पेश करने से पहले 9 नवम्बर को सार्वजनिक रूप से पेश किया, जिसमें एक तरह का जुलूस निकाला गया। करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत ने इस व्यवहार को अमानवीय और अपमानजनक करार दिया और सोशल मीडिया पर लाइव आकर मामले का समर्थन किया। शेखावत ने समुदाय के युवाओं से रायपुर में एक बड़े जुटान के लिए आह्वान किया है और कहा है कि वे प्रशासन की इस कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं करेंगे।
करणी सेना का आरोप
डॉ. शेखावत का कहना है कि तोमर कोई आतंकी नहीं था जिसे इसी प्रकार सार्वजनिक रूप से पेश किया जाये। वे इसे सामान्य व्यावसायिक लेन-देन का मामला बताते हुए बोले कि तोमर ने लोगों को आर्थिक सहायता दी थी और बाद में पैसे वापस लिए, इसे अपराधीकरण नहीं किया जाना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि कई फाइनेंस व्यवसाय इसी तरह चलते हैं और सबको समान तरीके से नहीं नापा जा रहा।
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लाइव में शेखावत ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने इस तरह की कार्रवाई जारी रखी तो क्षत्रिय समुदाय बड़े पैमाने पर राजधानी की ओर आना तय करेगा। उन्होंने कहा कि आंदोलन सिर्फ व्यक्तिगत समर्थन तक सीमित नहीं रहेगा और कई लोग रायपुर पहुंचकर अपनी मांगें रखेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि वे स्थानीय अधिकारियों और नेताओं को इसके लिए जिम्मेदार मानते हैं।
शेखावत ने विशेष रूप से एक पुलिस अधिकारी टीआई योगेश कश्यप पर महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार के आरोप लगाए और पुलिस द्वारा सीमाओं के उलट व्यवहार का हवाला दिया। उनका कहना था कि कार्यवाही के दौरान परिवार के अन्य सदस्यों को जोड़कर झूठे मामले बनाये गए और घर-परिवार की गरिमा को ठेस पहुंचाई गई।
स्थानीय पुलिस विभाग ने इन आरोपों के बाद सतर्कता बढ़ा दी है। अफसर सूत्रों के अनुसार सोशल मीडिया पर साझा किये गये प्रसारणों की जाँच उस पार की जा रही है और मामले की कानूनी पड़ताल चल रही है। पुलिस ने फिलहाल सार्वजनिक रूप से कोई बड़ा बयान जारी नहीं किया है, पर साइबर और लोककिल्याण एजेंसियां वीडियो व संदेशों की सत्यता जांच रही हैं।