सरगुजा में एकलव्य आवासीय स्कूल की 100 से अधिक छात्राएं हॉस्टल में बिजली, पढ़ाई, भोजन और सफाई की समस्याओं को लेकर करीब 20 किलोमीटर पैदल चलीं। कलेक्टर ने शिकायतें सुनीं और जांच टीम गठित कर दो दिन में रिपोर्ट मांगी।
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में एक सरकारी आवासीय स्कूल की 100 से अधिक छात्राएं सोमवार को करीब 20 किलोमीटर पैदल चलकर जिला मुख्यालय पहुंचीं। छात्राओं ने स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की कमी और पढ़ाई से जुड़ी समस्याओं को लेकर कलेक्टर से शिकायत की। बाद में अंबिकापुर से करीब 10 किलोमीटर पहले छात्राओं के लिए बस की व्यवस्था की गई। इसके बाद छात्राओं को जिला मुख्यालय स्थित कलेक्टोरेट ले जाया गया, जहां उन्होंने सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत से मुलाकात कर अपनी समस्याएं बताईं।
क्या है मामला?
छात्रों ने क्या बताया?
कलेक्टर अजीत वसंत ने छात्राओं से मुलाकात के बाद बताया कि उन्होंने मुख्य रूप से तीन समस्याएं उठाईं। छात्राओं ने कहा कि स्कूल में पिछले एक महीने से बिजली व्यवस्था बाधित है। स्कूल में दो डीजी सेट हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल केवल आपात स्थिति में किया जाता है और उनसे भी तीन से चार घंटे ही बिजली मिलती है। छात्राओं ने यह भी शिकायत की कि फिजिक्स और केमिस्ट्री के शिक्षक ठीक से पढ़ाई नहीं करा रहे हैं। इसके अलावा भोजन की गुणवत्ता और स्कूल में साफ-सफाई को लेकर भी छात्राओं ने शिकायत की।
कलेक्टर ने आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त को स्कूल में जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित करने और छात्राओं को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। अधिकारियों के मुताबिक, छात्राओं की शिकायतों की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की गई है। इसमें संयुक्त कलेक्टर शारदा अग्रवाल, सीतापुर के एसडीएम फागेश सिन्हा और आदिवासी विकास विभाग की सहायक संचालक किरण राजपूत शामिल हैं।
जांच टीम को स्कूल का दौरा कर दो दिन के भीतर कलेक्टर को रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, आश्रम छात्रावासों के लिए नियुक्त नोडल अधिकारियों को सभी छात्रावासों का एक सप्ताह के भीतर निरीक्षण कर रिपोर्ट देने को कहा गया है। कलेक्टर से मुलाकात के बाद एक छात्रा बेहोश हो गई। उसे एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया गया। अधिकारियों के मुताबिक उसकी हालत सामान्य है।
कांग्रेस नेता ने क्या कहा?
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि राज्य के आदिवासी छात्रावासों और आवासीय स्कूलों की खराब स्थिति ने भाजपा सरकार के आदिवासी हितैषी होने के दावों की पोल खोल दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार आदिवासी विकास को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन आदिवासी बच्चों को छात्रावासों में उचित भोजन, सुरक्षा, शिक्षक और सुरक्षित भवन तक उपलब्ध नहीं करा पा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि छात्रवृत्ति का पूरा भुगतान भी नहीं किया जा रहा है।
ठाकुर ने दावा किया कि इससे पहले कोरबा जिले के छुरी स्थित एकलव्य आवासीय स्कूल के विद्यार्थियों को एक महीने में तीसरी बार सड़क पर उतरना पड़ा था। इसी तरह सूरजपुर जिले के भुनेश्वरपुर छात्रावास की छात्राओं ने भी उचित भोजन और सुरक्षा की मांग को लेकर हाईवे पर बैठकर प्रदर्शन किया था।