बहुचर्चित वासेपुर दोहरे हत्याकांड के फरार दोषी शब्बीर (साबिर), आलम को धनबाद पुलिस की वैध अभिरक्षा से छुड़ाकर फरार कराने के मामले में अंबिकापुर कोतवाली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पिता-पुत्र को गिरफ्तार किया है। मामले में अन्य आरोपियों की तलाश जारी है, जबकि पुलिस शब्बीर आलम को वर्षों तक संरक्षण देने वालों की भूमिका भी खंगाल रही है।
पुलिस के अनुसार, धनबाद के बैंकमोड़ थाना के उपनिरीक्षक अभय कुमार अपनी टीम के साथ 29 जून को वारंटी शब्बीर उर्फ साबिर आलम की गिरफ्तारी के लिए अंबिकापुर पहुंचे थे। मुखबिर से सूचना मिली थी कि वह मोमिनपुरा क्षेत्र में पहचान छिपाकर रह रहा है। पुलिस ने मोमिनपुरा मस्जिद के पास स्कूटी सवार एक युवक को रोककर पूछताछ की, जिसने अपना नाम साबिर आलम बताया।
पुलिस जब गिरफ्तारी की वैधानिक प्रक्रिया पूरी कर रही थी, तभी आरोपी ने आसपास मौजूद लोगों को बुला लिया। आरोप है कि कुछ ही देर में मौके पर पहुंचे लोगों ने पुलिस टीम का विरोध करते हुए बल प्रयोग किया और वारंटी को पुलिस अभिरक्षा से छुड़ाकर फरार करा दिया। भीड़ का फायदा उठाकर अन्य लोग भी मौके से भाग निकले।
घटना के बाद कोतवाली थाना में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की गई। विवेचना के दौरान धनबाद पुलिस के अधिकारियों और गवाहों के बयान दर्ज किए गए। वीडियो कॉल और व्हाट्सएप के माध्यम से पहचान कराए जाने पर जुनैद खान (30) और उसके पिता मोहम्मद जाहिद खान (59) की घटना में संलिप्तता की पुष्टि हुई। पूछताछ में दोनों ने घटना में अपनी भूमिका स्वीकार की, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश कर दिया।
पुलिस का कहना है कि घटना में शामिल अन्य आरोपी अभी फरार हैं और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक शशिकांत सिन्हा, सहायक उपनिरीक्षक अदीप प्रताप सिंह, सहायक उपनिरीक्षक विवेक पांडेय तथा साइबर टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
13 साल तक शरण देने के आरोप में बस संचालक पर भी केस
जांच के दौरान अंबिकापुर पुलिस ने बस संचालक वैदुल खान के खिलाफ भी अपराध दर्ज किया है। आरोप है कि उसने वासेपुर हत्याकांड के दोषी शब्बीर आलम को करीब 13 वर्षों तक संरक्षण दिया, जबकि उसे उसकी दोषसिद्धि और फरार होने की जानकारी थी। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि अंबिकापुर में इतने लंबे समय तक शब्बीर आलम को किन-किन लोगों का संरक्षण मिलता रहा।
2001 के वासेपुर दोहरे हत्याकांड का आरोपी
पुलिस के अनुसार, शब्बीर आलम झारखंड के धनबाद स्थित वासेपुर में वर्ष 2001 के चर्चित दोहरे हत्याकांड का आरोपी है। आरोप है कि कोयला कारोबार में वर्चस्व की लड़ाई के दौरान 18 अक्टूबर 2001 को उसने फहीम खान की मां नजमा खातून और मौसी शहनाज खातून की गोली मारकर हत्या कर दी थी। वर्ष 2013 में गिरफ्तारी के बाद वह अदालत में पेशी के दौरान फरार हो गया था। वर्ष 2018 में झारखंड हाईकोर्ट ने उसे भगोड़ा घोषित करते हुए उसकी संपत्तियों की कुर्की के आदेश दिए थे।
वासेपुर की गैंगवार और कोयला माफिया की पृष्ठभूमि पर वर्ष 2012 में निर्देशक अनुराग कश्यप की चर्चित फिल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' बनी थी। हालांकि, यह मामला वास्तविक घटनाओं से प्रेरित माना जाता है और फिल्म की कहानी किसी एक व्यक्ति पर आधारित नहीं है।