एसडीएम अंबिकापुर को मजिस्ट्रियल जांच के निर्देश
कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी सरगुजा द्वारा घटना की मजिस्ट्रियल जांच हेतु एसडीएम अंबिकापुर फागेश सिन्हा को विस्तृत जांच करने अधिकृत किया गया है। एसडीएम अंबिकापुर मृत्यु के दृश्यमान कारणों की विधिवत जांचकर तीन दिनों के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करना सुनिश्चित करेंगे।
विभागीय जांच हेतु टीम का गठत
सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग ने बताया कि उक्त घटना की जांच हेतु दो सदस्यीय समिति गठित की गई है। जिसमें सहायक संचालक अंकिता मरकाम और सहायक संचालक महेंद्र पाल खांडेकर शामिल हैं, जो घटना की सूक्ष्म जांचकर जांच प्रतिवेदन तीन दिवस के भीतर उपलब्ध कराना सुनिश्चित करेंगे।
पथरी बीमारी से जुझ रहा था छात्र
प्री मैट्रिक अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास दरिमा में कक्षा आठवीं के छात्र मुकेश तिर्की पिता रामजी तिर्की 13 वर्ष, निवासी बिशुनपुर सीतापुर के द्वारा कमरे के भीतर फांसी लगाकर आत्महत्या करने के मामले में बुधवार को सामने आया था। पुलिस और परिजनों के मुताबिक, छात्र पिछले दो वर्षों से पथरी की बीमारी से जुझ रहा था। तकलीफ बढ़ने पर वह तीन दिन से स्कूल नहीं गया।
हॉस्टल में ही था। बुधवार को स्कूल से वापस लौटे अन्य छात्रों ने कमरे का दरवाजा बंद देख शोर मचाया। जिससे अनहोनी की आशंका पर रोशनदान से झांक कर देखने पर वह फांसी पर झुलता मिला। अनुमान लगाया जा रहा है कि पथरी बीमारी से तंग आकर छात्र ने फांसी लगाई होगी। घटना के संबंध में मिली जानकारी के मुताबिक, मुकेश तिर्की पिछले दो वर्षों से हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रहा था।
परिजन जड़ी बूटी से करा रहे थे इलाज
बताया जा रहा है कि छात्र मुकेश दो साल से पथरी की बीमारी से जुझ रहा था। परिजन जागरूकता अभाव में पुत्र का चिकित्सालय में भली भांती उपचार कराने के बजाए गांवों में ही जंगली जड़ी बूटियों के माध्यम से उपचार कर रहे थे। बताया जा रहा है कि छात्र को तकलीफ होने के बावजूद छात्रावास कर्मियों के द्वारा छात्र के इलाज के लिए कोई उचित कदम नहीं उठाया गया। ना तो चिकित्सालय लेकर गए और ना ही चिकित्सक का परामर्श ले उपचार ही शुरू कराया गया। यह बात सामने आई है किअत्यधिक दर्द होने पर अधीक्षक के द्वारा मेडिकल स्टोर से दर्द की दवा ले जाकर दे दी गई। लेकिन छात्र को कोई राहत नहीं मिली। जिससे तंग आकर उसने यह कदम उठाया।