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'दलित-आदिवासियों के साथ बंद हो अन्याय और अत्याचार': एडवोकेट भगवानू ने किया राहुल गांधी के ट्वीट का समर्थन

Tue, 31 Dec 2024 07:56 PM IST
ललित कुमार सिंह अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर

सार

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के देवास में दलित युवक की थाने में मौत और ओड़िशा के बालासोर में आदिवासी महिलाओं की पेड़ में बांधकर पिटाई करने की घटना से लोगों में भारी आक्रोश है। 
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अधिवक्ता भगवानू नायक, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के देवास में दलित युवक की थाने में मौत और ओड़िशा के बालासोर में आदिवासी महिलाओं की पेड़ में बांधकर पिटाई करने की घटना से लोगों में भारी आक्रोश है। इस मामले में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के मुख्य प्रवक्ता  और अधिवक्ता भगवानू नायक ने तीनों ही मामलों में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, राष्ट्रीय महिला आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को संज्ञान लेकर कार्यवाही करने की मांग की है। उन्होंने इस मामले में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के ट्वीट का समर्थन भी किया है। 
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राहुल गांधी ने इस ट्वीट में लिखा है कि एक तरफ मध्यप्रदेश के देवास में दलित युवक की पुलिस कस्टडी में हत्या की गई। दूसरी तरफ़ ओडिशा के बालासोर में आदिवासी महिलाओं को पेड़ से बांधकर पीटा गया है। ये दोनों घटनाएं दुखद, शर्मनाक और अत्यंत निंदनीय हैं। BJP की मनुवादी सोच के कारण उनके शासन वाले राज्यों में एक के बाद एक इस तरह की घटनाएं हो रही हैं - सरकार की शह के बिना ये संभव नहीं है।
देश के बहुजनों के साथ ऐसी बर्बरता किसी भी क़ीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हम उनके साथ हैं, उनके संवैधानिक अधिकारों के लिए और उन्हें न्याय दिलाने के लिए पूरी ताक़त के साथ लड़ेंगे।
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कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के ट्वीट का समर्थन करते हुए अधिवक्ता नायक ने कहा कि छत्तीसगढ़ समेत देश के अन्य राज्यों में दलित आदिवासियों के साथ अन्याय, अत्याचार करना बेहद ही शर्मनाक और घृणित कृत्य है, इसकी जितनी भी निंदा की जाये कम है। संविधान विरोधी और निम्न मानसिकता के लोग ही इस तरह की घटनाओं को अंजाम देते हैं। 

अधिवक्ता नायक ने कहा कि छत्तीसगढ़ में विगत दिनों दलित युवक करण तांडी आत्महत्या की घटना पर परिजनों ने पुलिस पर प्रताड़ना का आरोप लगाया था। ऐसे लोगों को सजा मिलें और देश में कानून का राज स्थापित रहे, इसके लिये अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 और भारतीय न्याय संहिता 2023 के अनुसार कड़ी कार्यवाही होनी चाहिये। ताकि इस तरह की घटनाओं पर विराम लगे। 
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