25 साल पुराना धार्मिक पीपल वृक्ष काटे जाने से पूरे गांव में हलचल मच गई है। गांव की 90 वर्षीय देवला बाई पटेल, जिन्होंने अपने हाथों से इस वृक्ष को लगाया और संतान की तरह पाला, कटे हुए ठूंठ को देखकर फूट-फूट कर रो पड़ीं।
छत्तीसगढ़ के खैरागढ़-छुईखदान-गंड़ई जिले के खैरागढ़ जिला मुख्यालय से तीन किलोमीटर दूर ग्राम सर्रागोंदी में हुई घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। वृक्ष कटने के बाद सोशल मीडिया में एक 90 वर्षीय देवला बाई की वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें बूढ़ी माता पेड़ के ठूंठ को देख कर रोती दिखाई दे रही है।
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दरअसल, गांव के बाहर स्थित एक विशाल पीपल वृक्ष, जिसे ग्रामीण वर्षों से हनुमानजी का देवस्थल मानते आए थे, अज्ञात व्यक्तियों ने इस पेड़ को काट दिया गया था। जिसकी शिकायत ग्रामीणों खैरागढ़ थाने में की थी और अब खैरागढ़ पुलिस ने आरोपी प्रकाश कोसरे और इमरान मेमन को गिरफ्तार कर लिया है।
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ग्रामीणों के अनुसार, यह पीपल वृक्ष सरकारी भूमि पर था और गांव की धार्मिक परंपरा से जुड़ा हुआ था। हर वर्ष गांव वाले घोड़ा देव की पूजा-अर्चना के बाद इसी वृक्ष की परिक्रमा करते थे। लोगों का विश्वास था कि इस पीपल में भगवान विष्णु, ब्रह्मा, शिव और देवी लक्ष्मी का वास है। पांच अक्टूबर की सुबह भी आरोपी ने वृक्ष कटवाने की कोशिश की थी, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के कारण उसे रोक दिया गया। इसके बावजूद रात के सन्नाटे में वृक्ष को पूरी तरह काट दिया गया।
ग्राम सर्रागोंदी की 90 वर्षीय देवला बाई पटेल ने 25 वर्ष पहले अपने हाथों से एक पीपल का पौधा लगाया था, रोज लोटे में पानी भरकर उसे सींचा, मानो संतान की तरह पाला। वह वृक्ष अब गांव की श्रद्धा का केंद्र बन चुका था, लेकिन कुछ दिन पहले किसी ने रात के अंधेरे में उसे काट डाला। देवला बाई जब उस कटे हुए वृक्ष के पास पहुंचीं, तो उनके कदम डगमगा गए आंखें नम थीं और होंठों से सिर्फ इतना निकला 'भगवान को कोई काट नहीं सकता… वो फिर लौट आएंगे।' गांव वालों ने उसी स्थान पर फिर एक नया पीपल लगाया है।