अरनपुर से पोटाली को जोड़ने वाली इस सड़क पर 13 साल बाद वाहनों की आवाजाही शुरू हुई थी। साल 2007 में नक्सलियों ने यहां बड़ा धावा बोलकर इस सड़क को 40 जगहों से खोद दिया था। इस काम के लिए आईईडी ब्लास्ट की मदद ली गई।
सीआरपीएफ के एक अधिकारी के अनुसार, नक्सली इस क्षेत्र पर अपनी पकड़ बनाए रखना चाहते हैं। उन्हें मालूम है कि यहां पर हो रहे विकास कार्य उनकी विदाई का संदेश है, इसलिए वे आए दिन ऐसी हरकत करते रहते हैं।
उनका मकसद है कि यहां पर कोई भी विकास कार्य न हो। पोटाली गांव के निकट पुलिस कैंप भी स्थापित किया गया है। अब यहां पर सड़क भी चालू हो गई थी। इससे आदिवासियों का जीवन बदलने लगा था।
गांव में नए काम धंधे भी शुरू हो रहे थे। स्वास्थ्य एवं दूसरी मूलभूत सेवाएं भी लोगों तक पहुंचने लगी थीं। अब नक्सलियों ने एक बार फिर उसी सड़क को काट डाला है।
इसके चलते अब दोबारा से अरनपुर, पोटाली, बुरगुम, ककाड़ी, नहाड़ी और सुकमा जिले के गोंडेरास गांव तक का सफर लोगों को पैदल ही तय करना पड़ेगा।
साथ ही कई गांव अब देश दुनिया से कट जाएंगे। सड़क के काटे जाने की वजह से अब कोई भी सरकारी सुविधा इन गांवों तक नहीं पहुंच सकेगी। बरसात के मौसम में तो यहां के लोगों को अनेक परेशानियों का सामना करना होगा।