छत्तीसगढ़ में नक्सलियों का खौफ आम आदमियों के अलावा पुलिस पर भी हावी है। सबसे ज्यादा खौफ पुलिसकर्मियों को बस्तर जिले से है। इस खौफ का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिन्हें बस्तर संभाग में तबादला का आदेश मिला है उनके पसीने छूटने लगे है।
कई पुलिस अधिकारियों ने तो अपने व परिजनों के स्वास्थ्य का हवाला देते हुए तबादला आदेश निरस्त करवाने की जी तोड़ कोशिश कर रहे है। वहीं कई लोग कोर्ट से स्टे लेने की कोशिश में लगे है।
इस बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने स्थानांतरण के बाद भी बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों में कार्यभार ग्रहण नहीं करने पर 15 पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया है।
राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आगामी विधानसभा चुनाव और प्रशासनिक दृष्टिकोण से पुलिस मुख्यालय द्वारा जुलाई और अगस्त माह में स्थानांतरण आदेश जारी किया गया था।
इनमें से जिन निरीक्षक और उपनिरीक्षकों ने कार्यमुक्त होने के बाद भी पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी स्थानांतरण के परिपालन में बस्तर रेंज के विभिन्न जिलों में कार्यभार ग्रहण नहीं किया है, उन्हें निलंबित कर दिया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि राज्य शासन ने 12 निरीक्षकों और तीन उपनिरीक्षकों को अनुशासनहीनता, स्वेच्छाचारिता और वरिष्ठ कार्यालय के आदेशों का उल्लंघन करने का दोषी पाया है और फलस्वरूप कठोर कार्यवाही करते हुए निलंबित कर दिया है।
राज्य सरकार ने जिन 12 निरीक्षकों एवं 3 उपनिरीक्षकों को निलंबित किया है उनके नाम इस प्रकार हैं- निरीक्षक कंवरदास प्रभाकर, बोनीफास एक्का, सुशील मलिक, केएमएस खान, श्रीमती संतोषी ग्रेस, बलदेव सिंह ठाकुर, रघुनंदन प्रसाद शर्मा, पासन लाल टिर्की, श्रीमती कुमारी चन्द्राकर, जवाहर लाल सिसोदिया, जोश कुरविल्ला, बाजीलाल सिंह, उपनिरीक्षक रोहित मालेकर, नरेन्द्र यादव, सत्येन्द्र सिंह श्याम।