वो अपने नवजात बेटे को अस्पताल छोड़ गांव लौट आई हैं। आप कुछ भी पूछ लें, लगभग सभी सवालों का जवाब उसकी चुप्पी ही होती है। बहुत कुरेदने पर छत्तीसगढ़ी में कहती हैं, “मुझे तो अपने बच्चे का चेहरा भी याद नहीं।”
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के एक गांव की 13 साल की इस मां के हिस्से बस चंद तारीखें हैं, कुछ बुरे सपने, पुलिस और सरकारी अफसरों की पूछताछ और घर-बाहर हर तरफ पसरी हुई गरीबी है। इसी साल गांव के ही 22 साल के युवक भरत लाल चौहान ने प्यार का वास्ता देकर 13 साल की इस बच्ची के साथ बलात्कार किया।
बच्ची जब गर्भवती हुई तो बात सामने आई। लेकिन तब तक सात महीने बीत चुके थे। लड़की की मां बताती हैं, “समाज के लोग बैठे। तय हुआ कि भरत मेरी बेटी को अपने साथ रखेगा। लेकिन उसने मेरी बेटी को भगा दिया।”
मोरगा के थाना प्रभारी गोपाल वैश्य बताते हैं कि अक्टूबर में यह मामला थाने पहुंचा तो उन्होंने दुष्कर्म और 'प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज एक्ट' यानी 'पोस्को' के तहत मामला दर्ज किया। फिर अभियुक्त को गिरफ्तार कर उसे जेल भेज दिया गया। वैश्य कहते हैं, 'पीड़िता का परिवार इतना गरीब है कि बच्ची के प्रसव की कौन कहे, दो जून खाना भी नहीं दे सकता। ऐसे में हमने बच्ची को महिला कल्याण केंद्र में रखा और फिर नवंबर में उसे अस्पताल में भर्ती कराया।”
अस्पताल में 13 साल की इस बच्ची ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। लेकिन फिर सवाल वही था कि इस बच्चे का क्या होगा? पीड़िता के परिवार ने बाल कल्याण समिति से अनुरोध किया कि उनका परिवार नवजात की देख-रेख करने में असमर्थ है, इसलिए उसे बाल कल्याण समिति अपना ले।
बेटे को अस्पताल में छोड़कर 13 साल की पीड़िता अपनी मां के साथ गांव लौट आई और पिछले हफ्ते शुक्रवार को बच्चे को एक अनाथालय में भेज दिया गया। सरकारी फाइल में किस्सा यहीं जाकर खत्म हो गया है।