बीजापुर जिले में नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता मिली है। पश्चिम बस्तर डिवीजन से जुड़े विभिन्न माओवादी संगठनों के 13 सक्रिय सदस्यों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया। आत्मसमर्पण करने वालों में 23 लाख रुपये के इनामी माओवादी शामिल हैं, जिनमें कंपनी नंबर-2 की महिला पार्टी सदस्य, एसीएम, केएएमएस अध्यक्ष, पीएलजीए, एलओएस और मिलिशिया प्लाटून के सदस्य हैं।
पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों में कई ऐसे माओवादी हैं जो वर्ष 2000 से संगठन में सक्रिय थे। इनमें देवे मुचाकी उर्फ प्रमिला (8 लाख रुपये का इनाम), कोसा ओयाम उर्फ राजेन्द्र (5 लाख रुपये का इनाम) और अन्य सदस्य शामिल हैं। आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादियों को छत्तीसगढ़ शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत 50,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई।
नियद नेल्ला नार योजना बनी बदलाव की धुरी
छत्तीसगढ़ शासन की नियद नेल्ला नार योजना ने आत्मसमर्पण की प्रक्रिया को गति दी है। इस योजना के तहत आत्मसमर्पण करने वालों को पुनर्वास, रोजगार, शिक्षा और सामाजिक पुनर्स्थापना की सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। इससे नक्सल हिंसा से प्रभावित ग्रामीणों को राहत मिली है और माओवादी मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
संयुक्त ऑपरेशन और सुरक्षा बलों की रणनीति सफल
बीजापुर में चल रहे नक्सल उन्मूलन अभियान में डीआरजी, बस्तर फाइटर, एसटीएफ, कोबरा और केरिपु के संयुक्त प्रयासों से यह सफलता हासिल हुई। अभियान का नेतृत्व पुलिस उप महानिरीक्षक बीएस नेगी, पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र कुमार यादव और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के वरिष्ठ अधिकारियों ने किया।
माओवादी संगठन को बड़ा झटका
आत्मसमर्पण करने वालों में कई वरिष्ठ माओवादी शामिल हैं, जिससे संगठन की पकड़ कमजोर हुई है। यह शासन की नीतियों और सुरक्षा बलों की रणनीति की सफलता का प्रमाण है।
मुख्यधारा में लौटने का आह्वान
पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र कुमार यादव ने माओवादियों से हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करने और शासन की पुनर्वास नीति का लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण करने वालों को आर्थिक सहायता के साथ-साथ सामाजिक प्रतिष्ठा, रोजगार और सम्मानजनक जीवन का अवसर प्राप्त होता है।
नक्सलमुक्त बस्तर की ओर अग्रसर
पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी 2025 से अब तक 270 माओवादी गिरफ्तार हुए, 241 ने आत्मसमर्पण किया और 126 विभिन्न मुठभेड़ों में मारे गए। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि बस्तर क्षेत्र नक्सलमुक्ति की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।