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CG: राज्य के निजी स्कूलों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत द्वितीय चरण में 10,478 विद्यार्थियों का हुआ चयन

Thu, 31 Jul 2025 08:39 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर

सार

छत्तीसगढ़ राज्य में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के अंतर्गत निजी स्कूलों में बच्चों को निःशुल्क प्रवेश देने की प्रक्रिया के द्वितीय चरण में चयनित विद्यार्थियों की सूची जारी कर दी गई है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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छत्तीसगढ़ राज्य में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के अंतर्गत निजी स्कूलों में बच्चों को निःशुल्क प्रवेश देने की प्रक्रिया के द्वितीय चरण में चयनित विद्यार्थियों की सूची जारी कर दी गई है। इस चरण में प्रदेश भर के 6,953 निजी स्कूलों से 42,362 पूर्ण स्वीकृत आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 16,967 सीटों पर पात्रता के आधार पर 10,478 विद्यार्थियों का चयन किया गया।
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जारी आंकड़ों के अनुसार, रायपुर जिले में सर्वाधिक 861 निजी स्कूलों से 6,559 पूर्ण स्वीकृत आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 750 बच्चों का चयन हुआ। बिलासपुर में 565 स्कूलों में 972 बच्चों का चयन हुआ, जबकि दुर्ग जिले के 538 स्कूलों में 667 बच्चों को प्रवेश के लिए चयनित किया गया। सूरजपुर जिले में सर्वाधिक 1,036 बच्चों का चयन हुआ है। वहीं जांजगीर-चांपा में 837, मुंगेली में 753, कोरबा में 504, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में 300, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 259, सक्ती में 324, रायगढ़ में 95, महासमुंद में 246, बलौदाबाजार-भाटापारा में 461, धमतरी में 159, गरियाबंद में 65, कवर्धा में 321, राजनांदगांव में 137 बच्चों का चयन शिक्षा का अधिकार के तहत निःशुल्क शिक्षा के लिए किया गया है। 

इसी प्रकार बेमेतरा में 213, बालोद में 156, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 73, मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी में 36, सरगुजा में 276, जशपुर में 279, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 183, कोरिया में 116, बलरामपुर में 671 और कांकेर में 104 बच्चों को चयनित किया गया। दूरस्थ आदिवासी अंचलों में भी चयन हुआ है, जिनमें बस्तर में 165, नारायणपुर से 11, कोण्डागांव में 127, बीजापुर में 97, दंतेवाड़ा से 45 और सुकमा से 31 बच्चों का चयन शिक्षा का अधिकार के तहत किया गया। 
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शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को आरक्षित सीटों पर प्रवेश दिया जाता है, जिससे उन्हें गुणवत्तापूर्ण निःशुल्क शिक्षा का समान अवसर मिल सके।
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