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हरियाणा: चुनावी दंगल में भाजपा का योगेश्वर दांव कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती

Thu, 10 Oct 2019 09:14 AM IST
Trainee Trainee अंकित चौहान, अमर उजाला, सोनीपत
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योगेश्वर दत्त (फाइल फोटो) - फोटो : social media
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बरोदा विधानसभा सीट को 10 साल पहले भले ही कांग्रेस ने इनेलो से छीन लिया हो, लेकिन इस बार भाजपा ने पहलवान योगेश्वर को चुनावी दंगल में उतारकर इसे हॉट सीट बना दिया है। योगेश्वर दत्त के मैदान में आने से कांग्रेस को कड़ी टक्कर मिल रही है। जहां कांग्रेस के श्रीकृष्ण हुड्डा के लिए हैट्रिक बनाना बड़ी चुनौती है।

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 क्योंकि जाट बहुल सीट पर तीन प्रमुख पार्टियों कांग्रेस, इनेलो व जजपा से जाट प्रत्याशी मैदान में उतरे हुए हैं तो भाजपा ने इसका फायदा लेने के लिए ब्राह्मण को मैदान में उतारा है। बरोदा विधानसभा सीट पर वर्ष 2000 में इनेलो का कब्जा रहा। इसके बाद वर्ष 2005 में भले ही प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी हो, लेकिन बरोदा सीट पर इनेलो का ही कब्जा कायम रहा। 

वर्ष 2009 के चुनाव में कांग्रेस ने बरोदा सीट को इनेलो से छीन लिया और कांग्रेस के श्रीकृष्ण हुड्डा ने जीत दर्ज की। वहीं वर्ष 2014 में जब प्रदेश में पूर्ण बहुमत के साथ भाजपा की सरकार बनी, तब भी कांग्रेस के श्रीकृष्ण हुड्डा का बरोदा पर कब्जा कायम रहा। इस सीट को कांग्रेस से छीनने के लिए भाजपा ने अपना आखिरी दांव योगेश्वर दत्त पर खेला है।
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क्योंकि बरोदा जाट बहुल क्षेत्र होने के कारण सभी प्रमुख पार्टियों के जाट प्रत्याशी उतारा जाना लगभग तय था। कांग्रेस से जहां दो बार से विधायक श्रीकृष्ण हुड्डा चुनावी मैदान में उतरे हुए हैं। वहीं इनेलो से जोगेंद्र मलिक तो जजपा से भूपेंद्र मलिक तीनों जाट प्रत्याशी मैदान में हैं।  
 

योगेश्वर दत्त- भाजपा
मजबूत पक्ष
  • अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी होने के साथ ही सेलिब्रिटी
  • भाजपा की लहर का फायदा
  • तीन मुख्य विपक्षी पार्टियों के प्रत्याशियों का जाट होना
कमजोर पक्ष
  • राजनीति की समझ नहीं होना
  • खिलाड़ी होने के कारण क्षेत्र में कम रहना
  • भाजपा से टिकट के दावेदार काफी होने से भितरघात
श्रीकृष्ण हुड्डा - कांग्रेस
मजबूत पक्ष
  • पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा का गढ़ होने का फायदा
  • 10 साल से विधायक होने से मजबूत पकड़
  • भाजपा में भितरघात
कमजोर पक्ष
  • दूसरे जिले का होने का नुकसान
  • कांग्रेस, इनेलो व जजपा से जाट प्रत्याशी होने का नुकसान
  • 10 साल विधायक होने के बावजूद क्षेत्र में समस्याएं

 
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यह हैं प्रमुख मुद्दे

मुख्य मुद्दों में पेयजल की समस्या सबसे ज्यादा है। विधानसभा क्षेत्र के अधिकतर गांवों में लोगों को पेयजल के लिए जूझना पड़ता है और खेतों से पानी लाकर प्यास बुझानी पड़ती है। इस समस्या का अभी तक कोई भी सरकार समाधान नहीं कर सकी। क्षेत्र में कोई भी कॉलेज नहीं है, जिससे युवक व युवतियों को कक्षा 12वीं के बाद पढ़ाई करने के लिए कई किलोमीटर दूर गोहाना आना पड़ता है। जिसके लिए परिवहन व्यवस्था भी सही नहीं है। क्षेत्र में कोई उद्योग नहीं होने के कारण रोजगार की बड़ी समस्या है।

वोटों का गणित
बरोदा विधानसभा क्षेत्र में 1 लाख 76 हजार 158 वोटर है, जिनमें 96804 पुरुष और 79354 महिला वोटर है। इस सीट पर सबसे ज्यादा लगभग 50 प्रतिशत जाट वोटर हैं तो अन्य में अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग, ब्राह्मण आदि शामिल है।
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