कार को पकड़ने के लिए अपनी लोकेशन गरचा टर्न के पास रखें। इस दौरान थोड़ी देर में कार इंडस्ट्रियल एरिया से गरचा टर्न की ओर आते हुए दिखाई दी। शिकायत के अनुसार, कार को देख पीसीआर ने उसका पीछा करना शुरू कर दिया और रेलवे लाइट प्वाइंट के पास कार को रुकने का इशारा किया गया, लेकिन चालक रुकने के बजाय पीसीआर को टक्कर मार भागने लगा।
इसके बाद पुलिस हरकत में आई और देखते ही देखते उसके पीछे तीन पीसीआर लग गईं। करीब तीन किलोमीटर तक पीछा कर कार चालक के पास पहुंची तो बापूधाम लाइट प्वाइंट के पास एक बार फिर चालक पीसीआर को टक्कर मारकर भागने लगा लेकिन पुलिस टीम की मुस्तैदी से चालक को वहीं दबोच लिया गया। पुलिस की शुरुआती में जांच में सामने आया कि चालक नशे में धुत है। इसके बाद उसका जीएमएसएच-16 में मेडिकल करवाया गया जहां उसके नशे में होने की पुष्टि हो गई।
पुलिस के अनुसार, चालक कनव प्रताप हून इंडस्ट्रियल एरिया स्थित एक कार कंपनी में बतौर डायरेक्ट के पद पर तैनात है। पुलिस पूछताछ में परिजनों ने बताया कि कनव घर से 40 हजार रुपये लेकर कहीं निकला था, जिसकी शिकायत उन्होंने पंचकूला सेक्टर-7 पुलिस स्टेशन में दी। शिकायत के आधार पर कंट्रोल रूम पर इसका वायरलेस हो गया। जैसे ही कार को टीपीटी लाइट प्वाइंट पर देखा गया तो चंडीगढ़ पुलिस भी हरकत में आ गई और चालक को धर दबोचा।
लेफ्टिनेंट जनरल दादा पीएन हून ने भारतीय सेना के ‘ऑपरेशन मेघदूत’ की अगुवाई कर किया था सियाचिन फतेह
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी कनव प्रताप हून, लेफ्टिनेंट जनरल प्रेम नाथ हून (रिटायर्ड) का पोता है। पीएन हून का परिवार पंचकूला के सेक्टर-6 में रहता है। सियाचिन ग्लेशियर लेफ्टिनेंट जनरल प्रेम नाथ हून की बहादुरी और दिलेरी का गवाह है। उनकी अगुवाई में भारतीय सेना ने 13 अप्रैल 1984 में ‘आपरेशन मेघदूत’ शुरू किया था, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय सेना ने दुनिया के सबसे ऊंचे सियाचिन ग्लेशियर पर अपना नियंत्रण कर लिया।