चंडीगढ़/पंचकूला। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) सिविल सर्विसेज 2023 का रिजल्ट मंगलवार को जारी हुआ। पंचकूला के योगेश दिलहोर ने ऑल इंडिया 55वीं और एकांश ढ़ुल ने 342वीं रैंक हासिल कर ट्राइसिटी का मान बढ़ाया, वहीं जीएमसीएच-32 चंडीगढ़ से एमबीबीएस कर डॉक्टर बनीं मनु वर्मा ने 434वीं रैंक और चंडीगढ़ के सरकारी स्कूल से पढ़े नीरज तरार ने 662वीं रैंक की। मनु के पिता चंडीगढ़ पुलिस में एएसआई और नीरज के पिता पीजीजीसी-11 में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं।
पंचकूला सेक्टर-31 में रहने वाले योगेश दिलहोर आईएएस अधिकारी बनेंगे। फिलहाल वह भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय में बतौर मुख्य अधिशासी अधिकारी के पद पर सुबाथू (सोलन) में तैनात हैं। योगेश दिलहोर ने बताया कि बीते वर्ष सिविल सेवा परीक्षा में उन्होंने 633वीं रैंक हासिल की थी। इसके बाद उन्हें रक्षा मंत्रालय में काम करने का मौका मिला। योगेश ने बताया कि उन्होंने हाईस्कूल की पढ़ाई भुज (गुजरात) के आर्मी पब्लिक स्कूल से की है। इंटरमीडिएट की पढ़ाई आर्मी पब्लिक स्कूल, चंडीमंदिर, पंचकूला से की। इसके बाद आईएएस बंगलूरू के प्रतिष्ठित नेशनल लॉ स्कूल से कानून की पढ़ाई की। उनके पिता रणबीर सिंह सेना में थे। सेवानिवृत्त होने के बाद वह बीडीपीओ कार्यालय रायपुररानी में बतौर पूर्व ग्राम सचिव की सेवा देकर सेवानिवृत्त हुए हैं। यूपीएससी में योगेश के सफल होने की खबर लगने पर बीडीपीओ कार्यालय रायपुररानी में कर्मचारियों और बीडीपीओ परमानंदन ने एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया। पिता रणबीर सिंह ने बताया कि योगेश का जन्म गांव रूखी जिला सोनीपत (हरियाणा) में हुआ था। जब वह आर्मी में थे तब बेटे ने देश के अलग-अलग शहरों में आर्मी पब्लिक स्कूल में पढ़ाई की। दसवीं और बारहवीं पंचकूला से पास करने के बाद आगे कानून की पढ़ाई नेशनल लॉ स्कूल बंगलूरू से की। उन्होंने बताया कि बेटे को अलग-अलग भाषाएं सीखने का शौक है। उन्होंने बताया कि बेटे की सफलता का पता लगने के बाद करीबी लोग लगातार बधाई दे रहे हैं।
सपने देखें और उन्हें साकार करने के लिए खूब मेहनत करें : एकांश
एकांश ढुल के पिता कृष्ण ढुल भाजपा के वरिष्ठ नेता और प्रदेश प्रवक्ता हैं। मां निर्मल हरियाणा के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में प्रिंसिपल हैं। एकांश ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता को दिया। कहा कि देश को विकसित बनाने के लिए सर्वोत्तम योगदान देना ही उनका लक्ष्य है। एकांश ने दसवीं की पढ़ाई सेंट कबीर स्कूल चंडीगढ़ और बारहवीं की पढ़ाई भवन विद्यालय चंडीगढ़ से की, फिर श्रीराम कॉलेज ऑफ कामर्स दिल्ली से बीकॉम ऑनर्स किया। एकांश का कहना है कि वह देश को मजबूत बनाने और युवाओं को प्रेरणा देने का काम करेंगे। उन्होंने कहा कि वह प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं से यही कहेंगे कि सिर्फ सपने मत देखें, उन्हें साकार करने के लिए दिन रात मेहनत करें क्योंकि दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं। पिता कृष्ण ढुल ने कहा कि उन्हें बेटे पर गर्व है। एकांश ने अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए दिन-रात कड़ी मेहनत की और नतीजा सामने है।
हार न मानें, मेहनत और लगन से प्रयास करते रहें, सफलता जरूर मिलेगी : मनु
ऑल इंडिया 434वीं रैंक पाने वाली डॉक्टर मनु वर्मा के पिता चंडीगढ़ पुलिस में एएसआई हैं और पुलिस कंप्लेंट सेल में डीएसपी के रीडर एएसआई पद पर तैनात हैं। मनु की सफलता से परिवार में जश्न का माहौल है। मनु ने बताया कि पढ़ाई पूरी कर जीएमसीएच-32 में ही नौकरी शुरू कर दी। तीन साल तक सुबह नौ से शाम पांच बजे तक नौकरी के साथ पढ़ाई की। पांचवें प्रयास में उन्होंने सफलता हासिल की। बताया कि पिता के पुलिस विभाग में होने से उनका रुझान शुरू से सिविल सेवा की ओर रहा लेकिन मेडिकल चुनने पर डॉक्टर बनने की ठानी और पहले प्रयास में जीएमसीएच-32 की 32 सीटों में से 18वीं रैंक हासिल कर ली। डॉक्टरी की पढ़ाई के दौरान मनु को आभास हुआ कि मेडिकल के क्षेत्र में विकास का दायरा सीमित है जबकि सिविल सेवा में अलग-अलग तरीके से आप देश सेवा कर सकते हैं। एमबीबीएस में इंटर्नशिप के दौरान यूपीएससी की परीक्षा में बैठने का निर्णय लिया और वर्ष 2019 में पहला अटेंप्ट दिया। दो अटेंप्ट में सफलता नहीं मिली, तीसरे में मेंस पास किया लेकिन इंटरव्यू रह गया। चौथे में प्रीलिम्स, मेंस कुछ नहीं हुआ। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और पांचवें प्रयास में सफलता हासिल की। पिता ने बेटी की सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि बेटी पर गर्व है। मनु ने सफलता का श्रेय अपने परिवार को दिया, जिसने उन्हें हमेशा सपोर्ट किया। उन्होंने कहा कि हार न मानें, मेहनत और लगन से प्रयास करते रहें, सफलता जरूर मिलेगी।
रोजाना 10 से 12 घंटे पढ़ाई कर पाई सफलता : नीरज
बारहवीं तक सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले नीरज तरार ने ऑल इंडिया 662वीं रैंक हासिल की है। चार साल की निरंतर मेहनत के बाद नीरज ने अपने तीसरे प्रयास में परीक्षा पास की। इससे उनके परिवार में खुशी का माहौल है। उन्होंने दसवीं तक की पढ़ाई जीएमएसएसएस-16 और 11वीं-12वीं की जीएमएसएसएस-10 से की है। एनआईटी दिल्ली से बीटेक कर वह सिविल सेवा की तैयारी कर रहे थे। उनके दादा हेड कॉन्स्टेबल थे। पिता देवराज पीजीजीसी-11 में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। नीरज ने बताया लोक सेवा करने और बदलाव लाने की दृष्टि से यूपीएससी की तैयारी की और रोजाना पढ़ाई के लिए 10-12 घंटे दिए। कहा कि माता-पिता को जब यूपीएससी में सफल होने की खबर दी तो उनकी खुशी का ठिकाना न रहा।