चंडीगढ़। शहर के कोयला कारोबारी मक्कड़ ब्रदर्स के घर पर गोलीबारी में गिरफ्तार एक आरोपी की उम्र पर लगा अड़ंगा खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। आरोपी बालिग है या नाबालिग, इसकी जांच के लिए पिछले कई दिनों से एनआईए टीम पंजाब के अलग-अलग स्कूलों के चक्कर काट रही है और सीबीआई कोर्ट में तारीख पर तारीख ले रही है। एनआईए के हाथ अब तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं लगा है, जिससे वह आरोपी की बालिग साबित कर सके। मंगलवार को मामले की सुनवाई हुई। अब 18 अप्रैल तक अगर आरोपी की उम्र संबंधी दस्तावेज नहीं मिला तो अदालत अपना फैसला सुना सकती है।
कुछ समय पूर्व मक्कड़ ब्रदर्स को विदेश में बैठे गैंगस्टर गोल्डी बराड़ ने फोन कर तीन करोड़ की रंगदारी मांगी थी। डराने के लिए कारोबारी के घर पर बदमाशों की ओर से फायरिंग कराई गई। पुलिस ने मामले में आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया लेकिन गोल्डी बराड़ को आतंकी घोषित किए जाने के कारण जांच एनआईए को सौंप दी गई। उधर, आरोपियों में से एक ने खुद को नाबालिग बताया, जिसके बाद से मामले में पेच फंसा हुआ है। एनआईए आरोपी को बालिग बता रही है। ऐसे में उसकी उम्र का दस्तावेज तलाशा जा रहा है। आरोपी के अधिवक्ता संदीप गुज्जर व अमरजीत चौधरी के मुताबिक, उनके मुवक्किल की उम्र 18 वर्ष से कम है लेकिन एनआईए ने उसे सीबीआई कोर्ट में पेश कर जेल में भेज दिया था। इसके बाद उन्होंने याचिका दायर की। इसके बाद आरोपी को बाल सुधार गृह भेजा गया।
एनआईए ने पेश किए प्राइवेट स्कूलों के हाथ से बने प्रमाण पत्र
मंगलवार को सुनवाई के दौरान एनआईए ने खरड़ व पंजाब के दो अन्य स्कूलों के प्रमाणपत्र पेश किए। तर्क दिया कि आरोपी के आधार कार्ड पर जन्म की तिथि व साल वर्ष 2006 लिखा है जबकि निजी स्कूलों के रिकॉर्ड के मुताबिक उसके जन्म का साल वर्ष 2002 है। अधिवक्ता संदीप गुज्जर ने दलील दी कि जन्मतिथि के लिए केवल 10वीं का अंकपत्र या जन्म प्रमाणपत्र ही मान्य है। दसवीं के अंकपत्र के मुताबिक, उसकी उम्र 18 वर्ष से कम है। वहीं, सुनवाई के दौरान एनआईए ने बाल सुधार गृह में बंद आरोपी के बयान दर्ज करने के लिए आवेदन दाखिल कर मंजूरी मांगी। कोर्ट ने फिलहाल मंजूरी नहीं दी, कहा कि पहले आरोपी की उम्र की याचिका पर फैसला आने दीजिए, इसके बाद आगे की कार्रवाई के लिए मंजूरी मिलेगी।