साल 2019 में पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ से जुड़े कई अहम मुद्दों पर सुनवाई की और बेहद अहम फैसले भी सुनाए। जांच की प्रक्रिया के दौरान आरोपी, गवाह और पीड़ित की जाति का जिक्र बंद करने, महिलाओं के लिए हेलमेट अनिवार्य करने जैसे बेहद अहम आदेश जारी कर इस वर्ष हाईकोर्ट ने व्यवस्था में बड़ा सुधार किया है। वर्ष भर में वकीलों की हड़ताल समाप्त करवाना हो या फिर रोडवेज कर्मियों की हड़ताल दोनों के माध्यम से लोगों को होने वाली समस्या का हल हाईकोर्ट ने किया। इनमें कुछ अहम निमभन हैं।
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बंद हुआ एफआईआर में जाति का जिक्र
जांच के दौरान दर्ज एफआईआर सहित इन्कवेस्ट रिपोर्ट, सीजर मेमो, रिकवरी मेमो सहित सीआरपीसी के किसी भी दस्तावेज पर आरोपी, पीड़ित और गवाह की जाति लिखने पर पूर्ण पाबंदी लगा दी है। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश जारी कर स्पष्ट कर दिया कि वह सुनिश्चित करें कि पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के सभी न्यायिक अधिकारियों को हाईकोर्ट के इस आदेश की सूचना मिल जाए। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के गृह सचिवों को भी हाईकोर्ट के इस आदेश के बारे में सभी जांच अधिकारियों को जानकारी देने के आदेश दिए हैं। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आगे से एफआईआर सहित किसी भी अन्य दस्तावेज में आरोपी, पीड़िता और गवाह के नाम के आगे उसकी जाति दर्ज न की जाए।
ट्रैफिक की कमान
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट शहर के ट्रैफिक से जुड़े मामलों की भी सुनवाई कर रहा है। लगातार ट्रैफिक चालान से जुडे आंकड़े़ मंगवाए जाते हैं और कोर्ट की निगरानी का ही नतीजा है कि शहर से मोडिफाइड साइलेंसर वाली बुलेट गायब हो गई। इसके अलावा पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की सख्ती के बाद ही शहर में केवल सिख महिलाओं को हेलमेट से छूट का निर्णय लिया गया। हालांकि हाईकोर्ट इससे भी संतुष्ट नहीं है और कोर्ट ने हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ से बिना पगड़ी की हर महिला के लिए हेलमेट अनिवार्य करने की दिशा में उठाए गए कदमों की जानकारी मांग ली है।
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वेंडरों की छुट्टी
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की सख्ती के बाद ही शहर से स्ट्रीट वेंडरों को हटाने की प्रक्रिया आरंभ की गई। स्ट्रीट वेंडर एक्ट होने के बावजूद भी निगम इसे लागू करने की दिशा में बहुत सुस्त काम कर रहा था। हाईकोर्ट ने इस मामले में सख्ती से एक्ट को लागू करने के लिए दबाव डाला तो जाकर निगम एक्टिव हुआ और सेक्टर 1 से 6 व 17 सेक्टर से सभी वेंडरों को हटाया। इसके साथ ही अन्य सेक्टरों में वेंडिंग जोन बनाएं जहां रजिस्टर्ड वेंडरों को बैठाया गया। वेंडरों ने हाईकोर्ट की शराण ली लेकिन कोई राहत नहीं मिली।
ड्रग तस्करी पर लगाम
पंजाब में बढ़ते ड्रग के कारोबार पर लगाम के लिए हाईकोर्ट ने दिशा निर्देश जारी किए। इनमें जेल में स्नीफर डॉग, डोप टेस्ट, हर जिले में पुनर्वास केंद्र, सभी स्कूलों का दौरा कर छात्रों को नशे के दुर्प्रभावों के बारे में जागरूक करना आदि शामिल हैं। कोर्ट ने एंटी नारकोटिक्स सेल को नशे की सबसे आदेश दे दिए हैं कि वह हर जिले में उन जगहों की पहचान करें जहाँ से सबसे अधिक नशे के तस्करों द्वारा ड्रग्स बेचे जाने की शिकायतें आती हैं और स्थानीय पुलिस से मिल नशा तस्करों की कमर तोड़ें। साथ ही राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं कि नाबालिगों को नशे से हर हाल में दूर रखा जाए। किसी भी होटल, रेस्टोरेंट्स, और बार आदि में नाबालिगों को शराब न परोसी जाए।
एकांत कारावास
फांसी की सजा सुनाने के बाद दोषी को एकांत कारावास में भेजे जाने के प्रावधान को हाईकोर्ट ने इस वर्ष समाप्त कर दिया। कोर्ट ने कहा था कि इस तरह किसी दोषी को अकेले वर्षों तक कारावास में रखे जाने से कुछ हासिल नहीं हो सकता है। मामला हरियाणा का था इसलिए हाईकोर्ट के यह आदेश हरियाणा के लिए थे। हाईकोर्ट ने फिलहाल हरियाणा को इस एकांत कारावास के प्रावधान में संशोधन के आदेश दिए हैं। यह प्रावधान पंजाब जेल मैन्युल का है जो हरियाणा में भी लागू होता है, लिहाजा हाईकोर्ट ने इस पर पंजाब सरकार को भी गौर करने को कहा है। हाईकोर्ट ने मामले में अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन द्वारा एकांत कारावास पर किए शोध का भी हवाला दिया है।
किलोमीटर स्कीम
हरियाणा सरकार द्वारा प्राइवेट बसों को प्रति किलोमीटर आधार पर हायर करने की स्कीम के खिलाफ हरियाणा रोड़वेज के कर्मचारी हड़ताल पर बैठ गए थे। इसके बाद पूरे प्रदेश में परिवहन की समस्या गंभीर हो गई थी। इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका पहुंची तो कोर्ट ने रोडवेज यूनियन के नेताओं को तलब किया। इस दौरान कोर्ट ने मध्यस्थ के तौर पर काम किया और हरियाणा सरकार द्वारा कर्मचारी नेताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई न करने के आदेश जारी किए थे। साथ ही कर्मचारी नेताओं को यह सुनिश्चित करने के आदेश दिए थे कि तुरंत ही हड़ताल को समाप्त कर काम सुचारू किया जाएगा। कोर्ट के दखल के बाद कर्मचारी नेता माने थे और हड़ताल खत्म हुई थी।
वकीलों का सबसे लंबा धरना
हरियाणा एडमिनस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल के गठन के फैसले के बाद पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के वकील धरने पर बैठे और इतिहास बना डाला। वकीलों ने 23 दिन काम सस्पेंड रखा और हाईकोर्ट के दखल के बाद जाकर हड़ताल खत्म हुई। इस दौरान विवादों का दौर जारी रहा और वकीलों का क्लाइंट्स और यहां तक कि मीडिया कर्मियों से भी विवाद हुआ। सबसे बड़ा विवाद तब हुआ था जब हाईकोर्ट जज के सचिव जब से आईडी कार्ड मांगा गया तो दोनों के बीच बहस हुई और फिर वकील ने सचिव को लात मार दी। इसके बाद कर्मचारियों में गुस्से की लहर दौैड़ पड़ी और वे हड़ताल पर चले गए।
वन क्षेत्र
हरियाणा सरकार द्वारा पंजाब भूमि परिसंरक्षण अधिनियम 1900(पीएलपीए) में संशोधन के बिल को संशोधित करने के मामले में हाईकोर्ट का दखल बेहद अहम रहा। हरियाणा ने 2006 में वन्य क्षेत्र बढ़ा कर 2020 में 20 प्रतिशत करने की योजना बनाई थी लेकिन हरियाणा में अब केवल 3.5 प्रतिशत वन ही बचा है। पीएलपीए हरियाणा के 10 जिलों में मौजूद शिवालिक व अरावली पहाडियों पर लागू है जहां नान फारेस्ट एक्टिविटी पर प्रतिबंध है। बिल पास होने से वन क्षेत्र में अवैध माइनिंग, पेड़ो की कटाई, भूमिगत जल स्तर गिरना, इमारतों का निर्माण होने से पर्यावरण प्रभावित होता। ऐसे में हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को वन भूमि पर किसी भी गैर वन्य कार्य न हो सुनिश्चित करने के आदेश जारी किए।
तेजाब की बिक्री
तेजाब की बिक्री रोकने की दिशा में इस साल हाईकोर्ट एक्टिव रहा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा तेजाब की बिक्री पर जारी दिशा निर्देशों के बावजूद इसकी सरेआम बिक्री पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा, पंजाब और यूटी प्रशासन को जमकर फटकारा। दिसंबर माह में तो हाईकोर्ट ने यहां तक कहा कि तीनों के आला अधिकारियों को तलब कर पीजीआई लेजाकर पीड़ितों से मिलवाएंगे क्या तब अधिकारी उनका दर्द समझेंगे। इसके साथ ही हाईकोर्ट तीनों के गृह सचिव को तलब भी कर चुका है। कोर्ट नियमों को सख्ती से लागू करने और तेजाब की बिक्री को नियंत्रित करने की दिशा में एक्टिव रहा।
सुखना लेक
सुखना लेक के अस्तित्व को खतरा होने के चलते हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई कई वर्ष पूर्व आरंभ की थी। इसके बाद सुखना में पानी के साथ ही अब इसके कैचमेंट एरिया और परिधि में अवैध निर्माणों का मामला भी शामिल कर लिया गया है। साथ ही कैचमेंट एरिया में अवैध तरीके से निर्मित हो रहे निर्माणों पर रोक के आदेश जारी किए हैं। इसी बीच कांसल के कुछ निवसियों ने भी हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा कि पहले यह देखा जाना चाहिए कि उनके निर्माण कैचमेंट एरिया में आते भी हैं या नहीं। इस वर्ष हाईकोर्ट के आदेश पर ही चंडीगढ़ प्रशासन ने सुखना को वैट लैंड घोषित करने की प्रक्रिया आरंभ की। जिसके बाद यह सामने आया कि सुखना को वैटलैंड कई साल पहले ही घोषित कर दिया था और प्रशासन इसे भूल बैठा था और नए सिरे से इसकी तैयारी कर रहा था।
ध्वनि प्रदूषण
ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए हाईकोर्ट ने एक कमेटी गठित की थी। सीनियर एडवोकेट एमएल सरीन, अक्षय भान और रीटा कोहली सहित अन्य की कमेटी ने अपने सुझाव सौंपते हुए कहा कि ध्वनि प्रदूषण को स्वच्छ भारत अभियान के तहत लाया जाना चाहिए। इकसे साथ ही लोगों को जागरुक करना होगा कि इसका मानव सहित पशु व पक्षियों पर कितना खतरनाक प्रभाव पड़ता है। हाईकोर्ट ने सुझावों पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा, पंजाब और यूटी से जवाब तलब कर लिया है। इनमें सबसे अहम बार-बार ध्वनि प्रदूषण के दोषी के खिलाफ न्यायालय की अवमानना की कार्रवाई और एफआईआर दर्ज करने का सुझाव है।
चंडीगढ़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बनने के लंबे समय बाद भी इंटरनेशनल उड़ाने आरंभ न होने पर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। हाईकोर्ट के दखल के कारण ही अंतराष्ट्रीय उड़ाने आरंभ हुई। अब इस वर्ष एयरपोर्ट को कैट 3 से लैस करने और पैरलल टैक्सी ट्रैक के निर्माण के लिए सुनवाई हो रही है। आसिशन देशों के लिए ओपन स्काई पॉलिसी के तहत शामिल 18 स्थानों में चंडीगढ़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट को शामिल करने के लिए हाईकोर्ट ने अब पंजाब और हरियाणा के सिविल एविएशन मंत्रालय, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया, चैल को एक बैठक कर चंडीगढ़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट के मुकाबले उन 18 एयरपोर्ट के पैसेंजर ट्रैफिक की समीक्षा कर रिपोर्ट सौंपने के आदेश जारी कर दिए हैं।
ट्रिब्यून फ्लाईऑवर
ट्रिब्यून फ्लाईऑवर के निर्माण के लिए प्रशासन ने सैकड़ों वृक्षों की कटाई का निर्णय लिया तो मामला हाईकोर्ट पहुंच गया। हाईकोर्ट ने शहर की सुंदरता और हरियाली को देखते हुए फ्लाई ऑवर के निर्माण हेतू इन वृक्षों को काटने पर फिलहाल रोक लगा दी है। इसके साथ ही कहा कि यहां की ट्रैफिक की समस्या के लिए फ्लाईओवर के सिवाय भी कोई अन्य विकल्प हो सकते हैं जिससे इन सैंकड़ों पेड़ों को बचाया जा सके। हाईकोर्ट ने कहा कि फ्लाईओवर की जगह अन्य क्या विकल्प हो सकता है इसके लिए अब आम लोगों से सुझाव मांगे जाएं। कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा दोनों को शामिल कर मुख्य सचिवों को शहरी विकास और राज्य ट्रांसपोर्ट विभाग के प्रतिनिधियों का चयन कर चंडीगढ़ प्रशासक के मुख्य सलाहकार की अध्यक्षता वाली कमेटी में शामिल कर ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए बैठक के आदेश दिए हैं।