पीजीआई में हो गया गजब का कारनामा, आने वाले मरीज को बीमारी कोई थी और उसकी जांच कुछ ओर हो गई, मामला जानकर हैरान हो जाएंगे। क्योंकि जांचकर्ता रिपोर्ट किसी और चीज की भी दे सकते हैं। यहां ऐसा लापरवाही के चलते होता है या भूलवश यह तो यहां के अधिकारी ही बता सकते हैं। लेकिन सच्चाई तो यह है कि इन गलतियों का खामियाजा भुगतना हर हाल में मरीज को ही पड़ता है।
ऐसी ही एक अव्यवस्था का शिकार हुए हैं प्रेमनगर निवासी सुनील कुमार। पीड़ित ने बताया कि वह बांये हाथ में सुन्नपन व दर्द की समस्या का उपचार कराने पीजीआईएमएस की मेडिसन ओपीडी में आये थे। चार अप्रैल को मेडिसन के डॉक्टरों ने उनको दवा लिखी और पांच अप्रैल को जांच कराई। 11 अप्रैल को सुनील को अस्थि रोग विभाग में भेज दिया गया।
यहां डॉक्टरों ने एमआरआई जांच कराने के लिए कहा और जांच फार्म भर कर दे दिया। उसने 15 अप्रैल को 2100 रुपये फीस दे कर एमआरआई जांच करवाई। लंबी कतार के चलते सुबह पांच बजे जांच कराने का नंबर आया और रिपोर्ट भी 25 अप्रैल को उसे दी गई। लेकिन जब डॉक्टर ने एमआरआई की रिपोर्ट देखी तो कहा कि उसने गर्दन के ऊपर एमआरआई जांच कराने को कहा था, उसने कमर की जांच क्यों करवा ली।