पहलवान नरसिंह यादव को नाडा से क्लीनचिट मिलने के बाद सोनीपत का साई सेंटर सवालों के घेरे में आ गया है।
बड़ा सवाल यह है कि जिस सेंटर में सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होने का अधिकारी दम भरते हैं, वहां इतनी बड़ी साजिश रचकर उसे अंजाम तक कैसे पहुंचा दिया गया? इस घटना से पहलवानों के लिए देश का सबसे अच्छा माने जाने वाले साई सेंटर की साख पर भी सवाल उठने लगे हैं। साई सेंटर की व्यवस्था से दुखी होकर नरसिंह यादव जिंदगी में यहां कभी भी नहीं आने की बात कह चुके हैं। हालांकि, अभी पुलिस की जांच चल रही है, जांच के बाद ही सामने आएगा कि किस तरह साजिश को अंजाम तक पहुंचाया गया।
नाडा ने जिस तरह पहलवान नरसिंह यादव को साजिश के तहत डोप में फंसाने के लिए खाने या पानी में कुछ मिलाने की बात कही है, उससे यह साफ होता दिख रहा है कि यह साजिश सोनीपत के साई सेंटर में रची गई है। सवाल उठने लगा है कि जहां ओलंपिक में क्वालीफाई करने वाले खिलाड़ियों के लिए कैंप लग रहा हो, वहां सुरक्षा-व्यवस्था को बेहतर करने की जगह रामभरोसे कैसे छोड़ दिया गया? जबकि नरसिंह यादव पहले ही अपनी जान को खतरा बता चुके थे।
ऐसे में सुरक्षा-व्यवस्था को बढ़ाने के बजाय ओलंपिक क्वालीफाई करने वाले खिलाड़ियों को लेकर साई के अधिकारी लापरवाह कैसे बने रहे? अधिकारियों ने सेंटर की व्यवस्था को चुस्त नहीं किया जिसका परिणाम यह हुआ कि ओलंपिक क्वालीफाई करने वाले खिलाड़ियों के कमरे और किचन तक आम खिलाड़ी आसानी से आते-जाते रहे। सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि साई सेंटर के अंदर इतनी बड़ी साजिश को रचकर अंजाम दे दिया गया और अफसरों एवं कर्मचारियों को भनक तक नहीं लगी? नाडा के फैसले के बाद इन सवालों का उठना लाजिमी है। अब अन्य खिलाड़ियों के जेहन में भी यह सवाल जरूर उठेगा कि साई सेंटर में वह सुरक्षित हैं या नहीं? इस सेंटर में भविष्य में लगने वाले कैंप से खिलाड़ी किनारा कर सकते हैं।