धान सीजन शुरू होने से पहले ही सरकार को पराली प्रबंधन की चिंता सताने लगी है। सरकार ने इस बार पराली जलाने के ‘जीरो बर्निंग’ के लक्ष्य को तय किया है। इसके लिए वीरवार को कई विशेषज्ञों व अफसरों के साथ इसी संदर्भ में मंथन भी किया गया।
हरियाणा की मुख्य सचिव केशनी आनंद अरोड़ा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से फसल अवशेषों को जलाने से रोकने के लिए सभी हितधारकों जिनमें सभी जिलों के उपायुक्त, हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति, हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव, हरसैक के निदेशक, आईओसीएल के कार्यकारी निदेशक, नाबार्ड के प्रतिनिधि, एएफसी इंडिया के एमडी, अखिल भारतीय कृषि इंपलिमेंटस मैन्युफैक्चरर संघ लुधियाना के प्रतिनिधि, हरियाणा कृषि इंपलिमेंटस मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन हिसार के प्रतिनिधि इत्यादि से फसल अवशेष प्रबंधन में आने वाली समस्याओं व सुझावों पर चर्चा की।
मुख्य सचिव ने कहा कि फसल अवशेष प्रबंधन की दिशा में पिछले वर्ष हरियाणा में अच्छा कार्य हुआ था। हरसैक के उपग्रही चित्रों व रिपोर्ट के अनुसार पूर्व के वर्षों के मुकाबले गत वर्ष फसल अवशेषों में आग लगाने की घटनाओं में 68 प्रतिशत की कमी आई थी। उन्होंने कहा कि इस बार हमें इससे भी आगे बढ़कर जीरो बर्निंग के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में कार्य करना है। जिसके लिए व्यापक स्तर पर योजना तैयार की जाए।
उन्होंने निर्देश दिए कि लाल तथा पीले जोन में आने वाले जिन गांवों में कस्टमर हायरिंग सेंटर नहीं हैं व जिन से अभी तक कोई आवेदन प्राप्त नहीं हुए हैं वहां से जल्द से जल्द आवेदन करवाये जाएं। उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिला में पराली जलाने वाले रेड जोन को विशेष रूप से फोकस किया जाए और योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जाए।
पराली जलाने की घटनाएं न हों, इसके लिए निगरानी टीमों का गठन कर नोडल अधिकारी बनाये जाएं। उन्होंने कहा कि गांव स्तर पर पंचायतों व किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक करें।