पिछले साल सितंबर में अनुबंध खत्म होने के बाद से नगर निगम ने लावारिस कुत्तों की नसबंदी ही नहीं कराई है। इस वजह से कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। वहीं, कुत्तों के काटने की घटनाएं भी तेजी से बढ़ी हैं। पिछले साल सितंबर में कुत्तों की नसबंदी करने वाली कंपनी का नगर निगम के साथ अनुबंध खत्म हो गया था। इसके बाद निगम ने कई बार टेंडर किया, लेकिन किसी कंपनी ने आवेदन नहीं किया।
विज्ञापन
इधर, नसबंदी न होने से कुत्तों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। अधिकारियों के अनुसार एक अप्रैल 2015 से लेकर सितंबर 2019 तक 14,443 लावारिस कुत्तों को नगर निगम की ओर से एंटी रैबीज के इंजेक्शन लगाए गए हैं। 2012 में हुए सर्वे के अनुसार, शहर में कुल 7900 लावारिस कुत्ते हैं, जबकि 7100 पालतू कुत्तों का रजिस्ट्रेशन कराया गया है। हालांकि, उसके बाद कंपनी का टेंडर खत्म हो गया तो कुत्तों के पकड़ने व नसबंदी का काम नहीं हो सका, लेकिन इस दौरान कुत्तों की संख्या में इजाफा हुआ है।
अधिकारियों के अनुसार कुत्तों के काटने की घटनाएं कम हुई हैं, क्योंकि लॉकडाउन में लोग अपने घरों में ही थे। वहीं, पार्षद महेश इंदर सिंह का कहना है कि कोरोना काल मे कुत्तों के काटने के मामले पिछले साल की तुलना में बढ़ गए हैं। उधर, डॉ. वीके नागपाल, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट जीएमएसएच-16 का कहना है कि लॉकडाउन से पहले सेक्टर-19 और 38 की डिस्पेंसरी में प्रतिदिन जहां 15 से 20 केस कुत्तों के काटने के आते थे, वहीं अब यह आंकड़ा 50 तक पहुंच गया है।
विज्ञापन
इस सप्ताह से शुरू होगा नसबंदी का काम
एमओएच विभाग के डॉ. एमएस कंबोज ने बताया कि कुत्तों की नसबंदी का टेंडर हो गया है। इस सप्ताह से नसबंदी का काम शुरू हो जाएगा। डॉ. अमनदीप प्रति माह 150 कुत्तों की नसबंदी करेंगे। एक कुत्ते की नसबंदी का 870 रुपये शुल्क तय किया गया है।
राष्ट्रीय सेमिनार के सुझावों पर कोई अमल नहीं
पिछले साल प्रशासक वीपी सिंह बदनौर के कहने पर नगर निगम ने लावारिस कुत्तों की समस्या से निपटने को एक राष्ट्रीय स्तर का सेमिनार आयोजित किया था। इस दौरान विशेषज्ञों ने कहा था कि खतरनाक ब्रीड के कुत्तों के पालने पर प्रतिबंध लगाया जाए, फीमेल कुत्तों की नसबंदी की जाए, नसबंदी का रिकॉर्ड रखा जाए ताकि दवा का असर खत्म होने के बाद उस कुत्ते की तत्काल फिर से वैक्सीनेशन की जा सके।
कुत्तों के खरीदने व बेचने का रिकॉर्ड बने, जागरूकता शिविर लगाए जाएं और वैक्सीन लगाने वाली दुकानों का पंजीकरण हो। अब तक इनमें से एक भी सुझाव पर अमल नहीं हुआ और न ही बैठक बुलाई गई। हैरानी की बात तो यह है कि निगम ने जागरूकता शिविर तक नहीं लगाए हैं। लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद घटनाओं में कोई कमी नहीं आई है।
11 माह में एडवांस एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर की दीवार ही बनी
रायपुरकलां में बनाए जाने वाले एडवांस एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर के लिए 11 माह में निगम सिर्फ एक चहारदीवारी बना सका है। चंडीगढ़ प्रशासक के एडवाइजर मनोज परिदा ने रायपुरकलां में 2019 अक्तूबर माह में एडवांस एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर की नींव रखी थी। 10 एकड़ में बनने वाले सेंटर की लागत लगभग एक करोड़ रुपये है, जहां 300 कुत्तों की एक साथ नसबंदी की जा सकती है।
इसके लिए एक माह में टेंडर करना था और एक साल में निर्माण कार्य पूरा होना था, लेकिन अब तक वहां एक बाउंड्रीवॉल बनी है। हालांकि, सेक्टर-38 वेस्ट में निगम का नसबंदी केंद्र है। जिस हिसाब से काम चल रहा है, उस हिसाब से 2 साल में भी काम पूरा होता नहीं दिख रहा है।
लगातार बढ़ रही कुतों के काटने की घटनाएं
शहर में कुत्तों की संख्या में जितनी तेजी से इजाफा हो रहा है, उतनी ही तेजी से कुत्तों के काटने की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। निगम इन घटनाओं पर रोक लगाने का दावा तो करता है, लेकिन कई बार हादसे इतने वीभत्स होते हैं कि लोगों का गुस्सा फूट जाता है। साल 2017 में पांच साल की बच्ची सादिया को मनीमाजरा में कुत्तों ने काट लिया था। कुत्तों ने बच्ची के हाथ व कान में काटा था। पीजीआई में भर्ती करने के बाद चंडीगढ़ में कहीं भी सीरम नहीं मिला।
उसके बाद अंबाला से सीरम मंगाया गया था, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और बच्ची की मौत हो गई। इसी तरह जून 2018 में सेक्टर-18 में डिवाइडिंग रोड के साथ लगते पार्क में खेलते समय डेढ़ साल के मलोया निवासी आयुष को कुत्तों ने नोच डाला था। उसके बाद शहर में एक अभियान चलाया गया। लोगों में आक्रोश इतना ज्यादा था कि इंसाफ के लिए सड़क पर उतर गए।
सख्ती का असर नहीं, पुलिस को भी करना पड़ा हस्तक्षेप
प्रशासन ने गार्डन में कुत्तों के घुमाने और कुत्ते पालने वालों के खिलाफ कानून तो सख्त बना दिए, लेकिन उसका असर नहीं दिखता। लोग लगातार लावारिस कुत्तों को रोटी व अन्य खाने-पीने का सामान डालते हैं, लेकिन उनकी जिम्मेदारी लेने से पीछे भागते हैं। वहीं, पार्कों में कुत्तों को घुमाने पर जुर्माना 500 रुपये से बढ़ाकर पांच हजार रुपये कर दिया गया है, लेकिन लोगों ने सवाल किया कि अब वह अपने पालतू कुत्तों को लेकर कहां जाएं। इसे लेकर कई बार विवाद हो चुके हैं। झगड़े इतने बढ़े कि पुलिस को जाकर मामला शांत कराना पड़ा। सेक्टर-7 में ऐसा ही मामला पिछले साल सामने आया था।
कुत्तों के लिए पेट गार्डन बनाने की योजना
नगर निगम कुत्तों को घुमाने के लिए सेक्टर-43 में डॉग पार्क बनाने की योजना तैयार कर रहा है। इसमें 1.5 एकड़ में कुत्तों को घुमाने के लिए पार्क बनेगा। यहां कुत्तों के खाने व पहनने के सामान भी होंगे। इसके अलावा पास में ही लोगों को घूमने के लिए पार्क बनेगा। हालांकि, एक पार्क पूरे शहर के काफी नहीं है, इसलिए निगम आगे अन्य पार्कों पर भी विचार कर सकता है।
हमारे पास एंटी रैबीज इंजेक्शन का स्टॉक: डॉ. नागपाल
सभी डिस्पेंसरी में एंटी रैबीज वैक्सीन की व्यवस्था है। सेक्टर-19 और 38 की डिस्पेंसरी में प्रमुख रूप से इन वैक्सीन को रखा गया है। फिलहाल सभी लोगों को वैक्सीन लगाया जा रहा है। रही बात स्टॉक की तो अभी सभी डिस्पेंसरी में एंटी रैबीज वैक्सीन उपलब्ध है। आगे भी तैयारी रखेंगे ताकि तत्काल वैक्सीन उपलब्ध हो सके।
- डॉ. वीके नागपाल, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट जीएमएसएच 16
टेंडर हो गया है, अब मामलों में आएगी गिरावट
कुत्तों की नसबंदी के लिए टेंडर हो गया है। अभी कर्मचारी कोरोना के कारण अन्य कार्यों में व्यस्त थे। अब प्रयास रहेगा कि कुत्तों के काटने की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।
- केके यादव, कमिश्नर, नगर निगम