चंडीगढ़ के स्वास्थ्य निदेशक डॉ. जी दीवान 30 सितंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। वर्ष 1985 में उन्होंने स्वास्थ्य विभाग में मेडिकल ऑफिसर के पद पर चार्ज संभाला था। उसके बाद डिप्टी मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, जिला टीकाकरण अधिकारी, नगर निगम में एमओएच, डिप्टी मेडिकल सुपरिंटेंडेंट और फिर चंडीगढ़ के स्वास्थ्य निदेशक के पद तक पहुंचे। 35 साल तक उन्होंने शहरवासियों की सेवा की। इतने लंबे समय तक शहर की सेवा करने और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर अमर उजाला संवाददाता ने उनसे बात की। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश।
सवाल: 35 वर्षों में शहर के स्वास्थ्य से जुड़े बुनियादी ढांचे में कितना बदलाव आया है?
जवाब: जिस तरह से इन सालों में शहर की आबादी बढ़ी है, उतनी तेजी से चंडीगढ़ में हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर भी बढ़ा है। 35 वर्षों में शहर की आबादी करीब नौ लाख बढ़ गई है। पहले नाम मात्र की डिस्पेंसरी थीं, लेकिन अब शहर में 52 डिस्पेंसरियां हैं। इनमें हेल्थ वेलनेस सेंटर व आयुष डिस्पेंसरी भी शामिल हैं, जहां 12 तरह की सुविधाएं मिल रही हैं। सेक्टर-22 और सेक्टर-45 पॉलीक्लीनिक को अपडेट कर उसे हास्पिटल में तब्दील किया गया। यहां पर अब जच्चा-बच्चा से जुड़ी सुविधाओं का लाभ न सिर्फ चंडीगढ़ बल्कि हरियाणा पंजाब के कई जिले के परिवार उठा रहे हैं। मनीमाजरा हास्पिटल को अपडेट कर 100 बेड का हास्पिटल बनाया गया। मनीमाजरा के हास्पिटल में सर्जरी, आर्थोपैडिक, स्थानीय इमरजेंसी व मदर एंड चाइल्ड से जुड़े मरीजों की देखभाल की जाती है।
सवाल: चंडीगढ़ के अस्पतालों में मरीजों का काफी बोझ है? क्या इसके मुताबिक सुविधाएं ठीक हैं?
जवाब: चंडीगढ़ की आबादी के हिसाब से तो ठीक है लेकिन पास लगते शहरों से भी काफी संख्या में मरीज इसलिए यहां आते हैं, क्योंकि यहां एडवांस तकनीक के साथ इलाज सस्ता और सुगम है। पिछले दिनों कुछ मीटिंग हुई है, जिसमें पता चला है कि अब पंजाब व हरियाणा तेजी से अपने यहां हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर मजबूत कर रहे हैं। जिस दिन ये प्रदेश मजबूत हो जाएंगे। अपने आप शहर का लोड कम होगा।
सवाल: चंडीगढ़ का अपना मेडिकल काउंसिल नहीं है?
जवाब: इसका प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा हुआ है। मुझे उम्मीद है कि जल्द ही इस पर भी फैसला होगा। इसके बनने से चंडीगढ़ के डाक्टरों का रजिस्ट्रेशन चंडीगढ़ में हो सकेगा। उन्हें पंजाब पर निर्भर नहीं होना पड़ेगा।
सवाल: कोरोना की वजह से ओपीडी बंद है। इससे नॉन कोविड मरीजों को काफी परेशानी आ रही है।
जवाब: जो स्थिति मार्च में थी, अब वो नहीं रही है। इस बारे में सभी चिंतित हैं। धीरे-धीरे ओपीडी खोलने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। एक साथ सारी ओपीडी नहीं खोली जाएंगी। चरणबद्ध तरीके से अगले ढाई से तीन महीने में सभी ओपीडी खुल जाएंगी। हालांकि सेक्टर 16 हास्पिटल में इमरजेंसी 24 घंटे चालू है। मेडिसिन, गाइनी, ईएनटी, पीडियाट्रिक की ओपीडी भी चल रही है।
सवाल: कोविड-19 का अनुभव कैसा रहा?
जवाब: इसमें एक बात कहना चाहूंगा कि मेरी टीम ने बहुत काम किया है। आयुर्वेदिक, स्किन, डेंटल की ओपीडी भले ही बंद हो, लेकिन इन डिपार्टमेंट के डाक्टरों ने फ्लू क्लीनिक में अपनी ड्यूटी दी है। जिस किसी को भी ड्यूटी के निर्देश दिए गए, उनमें से किसी ने भी मना नहीं किया। सुबह छह बजे से ड्यूटी शुरू हो जाती थी, जो देर रात तक जारी रहती थी और अब भी टीम जुटी हुई है।
सवाल: कोई खास योगदान, जिसके बारे में आप बताना चाहें?
जवाब: मैं कोई भी उपलब्धि व्यक्तिगत तौर पर नहीं लेता हूं। जो भी काम होता है, वो टीम करती है। पिछले दो सालों में चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने राष्ट्रीय स्तर पर टीकाकरण, जननी सुरक्षा योजना, पल्स पोलिया अभियान, जन्म पंजीकरण, खाद्य सुरक्षा जैसे कई संवेदनशील मुद्दों पर अवार्ड जीते हैं। पिछले दो सालों में चिकनगुनिया, डेंगू व मलेरिया जैसे रोगों को रोकने में कामयाबी मिली है। जीएमएसएच-16 में मेडिसिन, गाइनी, आर्थो, पीडियाट्रिक, जनरल सर्जरी, ईएनटी, स्किन सहित अन्य डिपार्टमेंट में डीएनबी कोर्स शुरू किए गए हैं, जिससे स्वास्थ्य सुविधाएं और मजबूत होंगी।
सवाल: भविष्य का कोई ऐसा प्रोजेक्ट, जो चंडीगढ़ के लोगों के लिए मायने रखता हो?
जवाब: जो नई टीम आ रही है, वह काफी सक्षम और इनोवेटिव है। मुझे पूरी उम्मीद है कि सरकार की नीतियों और चंडीगढ़ प्रशासन के प्रोजेक्ट को मजबूती से लागू करेंगे। एक प्रोजेक्ट, जो सारे हास्पिटल को नेटवर्किंग से जोड़ने का चल रहा है, उससे फायदा यह होगा कि बीमारियों पर निगरानी बढ़ेगी और जल्द उसे काबू किया जा सकेगा।