चंडीगढ़ में रहने के लिए जगह नहीं है। जो जगह है तो वो इतनी महंगी हैं कि लोग उसे खरीद नहीं सकते, इसलिए चंडीगढ़ के आसपास के शहर बढ़ते जा रहे हैं। कामकाजी लोगों को पता है कि चंडीगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाएं और शिक्षा अच्छी है, और बजट में है। पीजीआई में दाखिल होने वाले अधिकतर लोग चंडीगढ़ से बाहर के लोग होते हैं। कोरोना काल में दाखिल होने वाले अधिकतर मरीज चंडीगढ़ से बाहर के थे। अब चंडीगढ़ के संसाधन वही हैं, जो आज से दस साल पहले थे, इसलिए चंडीगढ़ के अस्पतालों व सड़कों पर भीड़ ज्यादा दिखती है।
ऐसी स्थिति में चंडीगढ़ के साथ आसपास की राज्यों की सरकारों को अपने संसाधन बढ़ाने होंगे। यदि पंचकूला में पीजीआई के बराबर कोई अस्पताल होता तो लोग चंडीगढ़ क्यों आते? और चंडीगढ़ में आने वाले लोगों को मना नहीं किया जा सकता। जहां बढ़िया सुविधाएं लोग वहां जरूर जाएंगे। ऐसे में चंडीगढ़ प्रशासन को भी अपने संसाधन बढ़ाने पर जोर देना होगा। हेरिटेज दर्जा शहर जैसी अवधारणा से बाहर आना होगा। तभी शहर का विकास हो सकेगा।
जनसंख्या दर घटने की वजह
इसका प्रमुख कारण कुल प्रजनन दर (टीएफआर) में कमी आना। यानी बच्चे पैदा करने की दर में कमी। साल 2013 में टीएफआर 2.3 दर्ज किया गया था, जबकि साल 2017 में टीएफआर 1.8 था। लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाने से लोगों में अब छोटा परिवार सुखी परिवार वाली समझ बढ़ी है। विशेषज्ञ कहते हैं कि यदि लोगों में लड़के की चाह न हो तो प्रजनन दर और नीचे आ जाए।
प्रजनन दर में कमी आने की एक वजह यह भी है कि अब परिवार की पहली प्राथमिकता बेटियों की पढ़ाई और नौकरी है। दूसरी बड़ी वजह है कि यहां पर रहने की अब जगह नहीं है। बिल्डिंग बायलॉज में कोई परिवर्तन किया नहीं गया। जिनके परिवार बड़े होते गए, वे चंडीगढ़ के बाहर जाकर बसते गए। नौकरीपेशा वाले लोग भी चंडीगढ़ के आसपास ठिकाना बना लिया।
जनसंख्या कम होने से नई समस्या खड़ी होगी
प्रो. नंदा कहते हैं कि पूरे देश में जनसंख्या कम होने का रुझान है। जो ठीक नहीं है। इस समय चीन एक बड़ी समस्या से गुजर रहा है। चीन में वन चाइल्ड पॉलिसी होने की वजह से बुजुर्गों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है जबकि उनकी देखरेख के लिए युवाओं की संख्या में भारी कमी है। यदि भारत में भी यही हाल रहा तो भविष्य में चीन जैसी समस्या का सामना इस देश को भी करना पड़ सकता है।
चंडीगढ़ की जनसंख्या वृद्धि दर में गिरावट है। लोगों को अब समझ में आ चुका है कि छोटे परिवार में ही तरक्की है। इस शहर की आबादी अब ज्यादा नहीं बढ़ेगी, क्योंकि यहां पर जगह सीमित है। -प्रो. अश्विनी कुमार नंदा, सेंटर फॉर रिसर्च इन रूरल एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट सेक्टर-19।
- साल कुल जनसंख्या दशकीय विकास दर
- 1951 24261 - - -
- 1961 119881 394.13
- 1971 257251 114.59
- 1981 451610 75.55
- 1991 642015 42.16
- 2001 900635 40.28
- 2011 1054686 17.10
योजनाओं के लिए आरक्षित जमीन
- सेक्टर-53 20.77 एकड़
- सेक्टर-54 30.80 एकड़
- आईटी पार्क 123.79 एकड़
- सेक्टर-52 25 एकड़
- सेक्टर-56 3 एकड़