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विश्व जनसंख्या दिवस: चंडीगढ़ में जनसंख्या वृद्धि दर घटी, लेकिन हैरान कर देंगे चौक-चौराहों के जाम, संसाधन भी कम पड़े

Sun, 11 Jul 2021 09:38 AM IST
ajay kumar आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

चंडीगढ़ में जनसंख्या वृद्धि दर घटी है लेकिन शहर के संसाधन कम पड़ने लगे हैं। इसके पीछे कई वजह हैं। चंडीगढ़ के अस्पतालों में शहर से ज्यादा दूसरों प्रदेशों के मरीज हैं। स्कूल-कॉलेजों में दाखिले के लिए मारामारी होती है। विशेषज्ञ जनसंख्या वृद्धि दर घटने के पीछे कई वजह बता रहे हैं। 
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चंडीगढ़ - फोटो : फाइल
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विस्तार
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पीजीआई की भीड़ हो या किसी चौक पर जाम। जब भी आपका वास्ता इनसे पड़ता होगा तो मन में सवाल जरूर उठता होगा कि इस शहर की आबादी कितनी बढ़ गई है? जबकि हकीकत कुछ और है। साल 1951 से 2011 के जनगणना के आंकड़ों से पता चलता है कि चंडीगढ़ की जनसंख्या वृद्धि लगातार घट रही है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि चंडीगढ़ की आबादी नहीं बढ़ेगी, बढ़ेगी लेकिन पिछले सालों के मुकाबले काफी कम। 

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यह रुझान सिर्फ चंडीगढ़ में नहीं बल्कि देश के कई राज्यों में देखा गया है। पंजाब, केरल और गोवा की जनसंख्या वृद्धि दर में गिरावट दर्ज की गई है। बावजूद इसके चंडीगढ़ के संसाधनों पर लगातार बोझ बढ़ता जा रहा है। अस्पतालों में इलाज के लिए बेड नहीं मिलते। ओपीडी में नंबर नहीं आता। कॉलेज हो या स्कूल एडमिशन के लिए मारामारी रहती है। आखिर ऐसा क्यों? जबकि आबादी की दर घट रही है।

सेक्टर -19 स्थित सेंटर फॉर रिसर्च इन रूरल एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट में पापुलेशन रिसर्च सेंटर से जुड़े प्रोफेसर अश्विनी कुमार नंदा का कहना है कि पंचकूला, मोहाली, जीरकपुर, खरड़ और नयागांव के ज्यादातर नौकरीपेशा लोग चंडीगढ़ पर ही निर्भर हैं। ये लोग सुबह चंडीगढ़ आते हैं और काम खत्म कर शाम तक निकल जाते हैं। 

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चंडीगढ़ में रहने के लिए जगह नहीं है। जो जगह है तो वो इतनी महंगी हैं कि लोग उसे खरीद नहीं सकते, इसलिए चंडीगढ़ के आसपास के शहर बढ़ते जा रहे हैं। कामकाजी लोगों को पता है कि चंडीगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाएं और शिक्षा अच्छी है, और बजट में है। पीजीआई में दाखिल होने वाले अधिकतर लोग चंडीगढ़ से बाहर के लोग होते हैं। कोरोना काल में दाखिल होने वाले अधिकतर मरीज चंडीगढ़ से बाहर के थे। अब चंडीगढ़ के संसाधन वही हैं, जो आज से दस साल पहले थे, इसलिए चंडीगढ़ के अस्पतालों व सड़कों पर भीड़ ज्यादा दिखती है।

ऐसी स्थिति में चंडीगढ़ के साथ आसपास की राज्यों की सरकारों को अपने संसाधन बढ़ाने होंगे। यदि पंचकूला में पीजीआई के बराबर कोई अस्पताल होता तो लोग चंडीगढ़ क्यों आते? और चंडीगढ़ में आने वाले लोगों को मना नहीं किया जा सकता। जहां बढ़िया सुविधाएं लोग वहां जरूर जाएंगे। ऐसे में चंडीगढ़ प्रशासन को भी अपने संसाधन बढ़ाने पर जोर देना होगा। हेरिटेज दर्जा शहर जैसी अवधारणा से बाहर आना होगा। तभी शहर का विकास हो सकेगा।

जनसंख्या दर घटने की वजह
इसका प्रमुख कारण कुल प्रजनन दर (टीएफआर) में कमी आना। यानी बच्चे पैदा करने की दर में कमी। साल 2013 में टीएफआर 2.3 दर्ज किया गया था, जबकि साल 2017 में टीएफआर 1.8 था। लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाने से लोगों में अब छोटा परिवार सुखी परिवार वाली समझ बढ़ी है। विशेषज्ञ कहते हैं कि यदि लोगों में लड़के की चाह न हो तो प्रजनन दर और नीचे आ जाए। 
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प्रजनन दर में कमी आने की एक वजह यह भी है कि अब परिवार की पहली प्राथमिकता बेटियों की पढ़ाई और नौकरी है। दूसरी बड़ी वजह है कि यहां पर रहने की अब जगह नहीं है। बिल्डिंग बायलॉज में कोई परिवर्तन किया नहीं गया। जिनके परिवार बड़े होते गए, वे चंडीगढ़ के बाहर जाकर बसते गए। नौकरीपेशा वाले लोग भी चंडीगढ़ के आसपास ठिकाना बना लिया।

जनसंख्या कम होने से नई समस्या खड़ी होगी
प्रो. नंदा कहते हैं कि पूरे देश में जनसंख्या कम होने का रुझान है। जो ठीक नहीं है। इस समय चीन एक बड़ी समस्या से गुजर रहा है। चीन में वन चाइल्ड पॉलिसी होने की वजह से बुजुर्गों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है जबकि उनकी देखरेख के लिए युवाओं की संख्या में भारी कमी है। यदि भारत में भी यही हाल रहा तो भविष्य में चीन जैसी समस्या का सामना इस देश को भी करना पड़ सकता है।
चंडीगढ़ की जनसंख्या वृद्धि दर में गिरावट है। लोगों को अब समझ में आ चुका है कि छोटे परिवार में ही तरक्की है। इस शहर की आबादी अब ज्यादा नहीं बढ़ेगी, क्योंकि यहां पर जगह सीमित है। -प्रो. अश्विनी कुमार नंदा, सेंटर फॉर रिसर्च इन रूरल एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट सेक्टर-19।
 
  • साल    कुल जनसंख्या  दशकीय विकास दर
  • 1951     24261        - - -
  • 1961    119881     394.13
  • 1971    257251    114.59
  • 1981    451610     75.55
  • 1991    642015     42.16
  • 2001    900635     40.28
  • 2011    1054686   17.10
योजनाओं के लिए आरक्षित जमीन
  • सेक्टर-53      20.77 एकड़
  • सेक्टर-54     30.80 एकड़
  • आईटी पार्क   123.79 एकड़
  • सेक्टर-52     25 एकड़
  • सेक्टर-56     3 एकड़
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