- चिड़चिड़ापन, तनावग्रस्त और अशांत महसूस करें
- आराम करना या ध्यान केंद्रित करना कठिन हो जाए
- खुद के बारे उदासीनता या बुरा महसूस करना
- खुद को नुकसान पहुंचाने का विचार बार-बार आना
- चिंतित, भयभीत, घबराया हुआ या तनावग्रस्त, उत्साहहीन महसूस करना
- शारीरिक लक्षण जैसे पसीना आना, शरीर का कांपना, चक्कर आना या तेजी से दिल की धड़कन बढ़ जाना
ऐसे दूर करें तनाव
- मानसिक रूप से मजबूत बनें। विपरीत परिस्थिति में भी धैर्य रखें
- छोटी-छोटी बातों का बुरा न मानें। एक-दूसरे से बातें करें और नकारात्मक बातों पर चर्चा कम करें
- समय पर सोए, जागें, भोजन और व्यायाम करें
- डर, उदासी है तो अपने अंदर छुपाएं नहीं बल्कि परिजनों या दोस्तों से जाहिर करें
पीजीआई में बाल मरीजों की बढ़ रही संख्या
- ओपीडी 2020 2019 2018
- नए मरीज 13599 14887 20805
- पुराने रोगी 75004 103074 72802
- भर्ती मरीज 305 309 2484
बाल एवं किशोर मनोरोग क्लीनिक
- ओपीडी 2020 2019 2018
- नए रोगी 1171 1226 1069
- पुराने रोगी 3494 2577 1777
- भर्ती मरीज 103 72 49
कोरोना के दौरान तीन तरह के लोग मानसिक रूप से प्रभावित हुए हैं। एक तो जो संक्रमित हुए, दूसरे जिनके परिवार में कोई अनहोनी हुई और तीसरे जो उस दौरान में हिंसा के शिकार हुए। इन तीनों की स्थिति अलग थी लेकिन मानसिक दबाव एक समान। बच्चों पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ा है। जो पहले से मानसिक विकार से ग्रस्त थे, उनकी परेशानी और गंभीर हुई। कोविड के दौरान भी टेली मेडिसिन के माध्यम से एक दिन में 100 से ज्यादा मरीजों को परामर्श दिया गया। - डॉ. प्रीति अरुण, निदेशक, मेंटल हेल्थ इंस्टीट्यूट।