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विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस: कोरोना ने दिमाग को भी नहीं छोड़ा, बढ़े मानसिक विकार के मरीज

Sun, 10 Oct 2021 01:27 PM IST
ajay kumar वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

गवर्नमेंट रिहैबिलिटेशन इंस्टीट्यूट फॉर इंटेलेक्चुअल डिसएबिलीटीज (ग्रिड) के डॉ. वसीम का कहना है कि मानसिक विकारों में अवसाद, व्यग्रता, सिजोफ्रेनिया, बाइपोलर विकार, विकास संबंधी अज्ञात बौद्धिक विकृति, आचरण संबंधी विकार और ऑटिज्म शामिल हैं। च्लांसेट साइकेट्रीज में प्रकाशित अध्ययन के परिणामों के मुताबिक, 2017 में 19.7 करोड़ भारतीय मानसिक विकार से ग्रस्त थे। इनमें से 4.6 करोड़ लोगों को अवसाद था और 4.5 लाख लोग व्यग्रता के विकार से ग्रस्त थे।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोरोना महामारी का लोगों की मानसिक अवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ा है, इसलिए इस बार मानसिक स्वास्थ्य दिवस की थीम एक असमान दुनिया में मानसिक स्वास्थ्य ( मेंटल हेल्थ इन एन अनइक्वल वर्ल्ड) रखा गया है। कोरोना संक्रमण के दौरान एकांतवास, लोगों से शारीरिक दूरी, आर्थिक तंगी और भविष्य की चिंता ने मानसिक स्थिति को बुरी तरह प्रभावित किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बेहद गंभीर स्थिति है।

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मनोरोग चिकित्सकों के अनुसार, इसका परिणाम धीरे-धीरे लेकिन व्यापक रूप में आएगा। ऐसे में उनकी राय है कि धैर्य के साथ वास्तविकता का सामना करें और किसी भी बदलाव को नजरअंदाज न करें। कोरोना काल में मानसिक अवस्था पर पड़े दुष्प्रभाव का ही असर है कि ओपीडी बंद होने के बावजूद मनोरोग विभाग में मरीजों के इलाज की रफ्तार कम नहीं हुई। 

चौंकाने वाली बात यह है कि 2020 में इलाज के लिए पीजीआई आने वाले मरीजों में वयस्कों की तुलना में बच्चों की संख्या ज्यादा रही। पीजीआई मनोचिकित्सा विभाग के डॉ. सुबोध बीएन का कहना है कि विपरीत परिस्थितियों में तनाव बढ़ने लगता है। सामान्य तनाव तो हमारे लिए अच्छा होता है। इससे आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहन मिलता है लेकिन अधिक तनाव से संकट की स्थिति बन जाती है। ये तब होता है जब हमें आगे कोई रास्ता नहीं दिखता। घबराहट होती है और हम खुद को ऊर्जाहीन महसूस करते हैं। इस तनाव का असर शरीर, दिमाग, भावनाओं और व्यवहार पर पड़ता है।

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ये लक्षण दिखें तो संभल जाएं

  • चिड़चिड़ापन, तनावग्रस्त और अशांत महसूस करें
  • आराम करना या ध्यान केंद्रित करना कठिन हो जाए
  • खुद के बारे उदासीनता या बुरा महसूस करना
  • खुद को नुकसान पहुंचाने का विचार बार-बार आना
  • चिंतित, भयभीत, घबराया हुआ या तनावग्रस्त, उत्साहहीन महसूस करना
  • शारीरिक लक्षण जैसे पसीना आना, शरीर का कांपना, चक्कर आना या तेजी से दिल की धड़कन बढ़ जाना
ऐसे दूर करें तनाव
  • मानसिक रूप से मजबूत बनें। विपरीत परिस्थिति में भी धैर्य रखें
  • छोटी-छोटी बातों का बुरा न मानें। एक-दूसरे से बातें करें और नकारात्मक बातों पर चर्चा कम करें
  • समय पर सोए, जागें, भोजन और व्यायाम करें
  • डर, उदासी है तो अपने अंदर छुपाएं नहीं बल्कि परिजनों या दोस्तों से जाहिर करें

पीजीआई में बाल मरीजों की बढ़ रही संख्या
  • ओपीडी         2020        2019        2018
  • नए मरीज    13599      14887       20805
  • पुराने रोगी    75004      103074    72802
  • भर्ती मरीज   305           309          2484
बाल एवं किशोर मनोरोग क्लीनिक
  • ओपीडी            2020        2019        2018
  • नए रोगी          1171        1226        1069
  • पुराने रोगी       3494        2577        1777
  • भर्ती मरीज      103           72            49
कोरोना के दौरान तीन तरह के लोग मानसिक रूप से प्रभावित हुए हैं। एक तो जो संक्रमित हुए, दूसरे जिनके परिवार में कोई अनहोनी हुई और तीसरे जो उस दौरान में हिंसा के शिकार हुए। इन तीनों की स्थिति अलग थी लेकिन मानसिक दबाव एक समान। बच्चों पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ा है। जो पहले से मानसिक विकार से ग्रस्त थे, उनकी परेशानी और गंभीर हुई। कोविड के दौरान भी टेली मेडिसिन के माध्यम से एक दिन में 100 से ज्यादा मरीजों को परामर्श दिया गया। - डॉ. प्रीति अरुण, निदेशक, मेंटल हेल्थ इंस्टीट्यूट।
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