यदि आप में तनाव, मोटापा, हाई बीपी के लक्षण हैं तो एक बार लिवर की जांच जरूर करवाएं। संभव है कि आपके लिवर में फैट जमा हो। ज्यादा जानकारी के लिए पढ़ें ये विशेष खबर।
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फाइल फोटो
यह खुलासा पीजीआई की एक स्टडी में हुआ है। पीजीआई ने करीब एक हजार लोगों के लिवर की जांच की, जो हेल्दी थे और पीजीआई में ब्लड डोनेट करने पहुंचे थे। इनमें करीब 53 फीसदी ऐसे लोग मिले, जिनमें नॉन एल्कोहल्कि फैटी लिवर डिजीज (एनएएफएलडी) के लक्षण मिले। पीजीआई के डाक्टरों का कहना है कि लाइफ स्टाइल बदलने से लोग फैटी लिवर की बीमारी से पीड़ित हो रहे हैं। यदि कोई व्यक्ति ओवरवेट है, मोटापा, हाईपरटेंशन और हाई बीपी का शिकार है तो उसे चेत जाना चाहिए और लिवर की एक बार जांच जरूर करवानी चाहिए।
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80 फीसदी लिवर डैमेज होने के बाद बीमारी का पता चलता
बिगड़ते खानपान की वजह से हर दूसरे या तीसरे घर में किसी न किसी व्यक्ति में यह बीमारी हो रही है। पीजीआई डाक्टरों ने बताया कि फैटी लिवर के साथ सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि जब 80 फीसदी लिवर डैमेज हो जाता है, तब जाकर इसका पता चलता है। शुरुआती दौर में इसके लक्षण नजर नहीं आते हैं। ऐसे में लोगों को रुटीन जांच करवाते रहना चाहिए। यदि कोई दिक्कत आती है तो लिवर स्पेशलिस्ट से जरूर दिखवाएं।
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क्या है फैटी लिवर
जब लिवर में चर्बी जमा होती है तो ऐसी स्थिति को फैटी लिवर कहा जाता है। जिस तरह मोटे होने पर हमारे शरीर के बाकी हिस्सों पर चर्बी जमा होती है, ठीक उसी तरह लिवर में भी चर्बी जमा होती है। लिवर में एकत्रित हुआ फैट उसके नॉर्मल सेल्स को खत्म करना शुरू कर देता है। इसका असर यह होता है कि लीवर बीमार होने लगता है। इसकी वजह से भविष्य में हेपेटाइटिस, सिरोसिस, फाइब्रोसिस और कैंसर जैसी बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है।
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लक्षण
पीलिया, भूख न लगना, पेट के अंदर पानी भर जाना आदि फैटी लीवर के लक्षण हैं। फैटी लीवर के एडवांस स्टेज में पहुंच जाने पर मरीज के दिमाग पर भी असर पड़ने लगता है, उसका दिमाग काम नहीं करता है, मरीज अपना होश खोने लगता है। उसे खून की उल्टियां होने लगती है। ये सारे लक्षण फैटी लीवर के ही होते हैं।
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दस साल में तीन गुने मरीज
पीजीआई के हीप्टोलाजी डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. आरके धीमन ने बताया कि दस साल पहले जितने मरीज आते थे, आज तीन गुना ज्यादा आ रहे हैं। बच्चों में भी फैटी लिवर की समस्या देखी जा रही है। आजकल बच्चों ने आउटडोर गेम्स खेलने बंद कर दिए हैं। दिन भर वे बैठकर पढ़ते हैं, जो समय बचता है तो वे मोबाइल पर अपना समय बिताते हैं। लिवर की बीमारियों में नंबर वन शराब पीने से लिवर डैमेज होना, दूसरे नंबर पर वायरल हैपेटाइटिस बी-सी, तीसरे नंबर फैटी लिवर और चौथे नंबर पर मेटाबोलिक लिवर डिजीज व अन्य बीमारियां आती हैं।
क्या करें
अपने वजन को कंट्रोल करें। रोजाना कम से कम 45 मिनट की एक्सरसाइज करें। बैलेंस और हेल्दी डाइट लें। कम मात्रा में चीनी लें। साफ पानी पीएं। कॉफी और ग्रीन टी पी सकते हैं। हैपेटाइटिस बी का टीका लगवाएं।
जिन लोगों में तनाव, मोटापा, हाई बीपी की शिकायत है और एक्सरसाइज नहीं करते हैं वे अपने लिवर की रुटीन जांच जरूर करवाएं। फैटी लिवर के शुरुआत में कोई लक्षण नहीं आते। फैटी लिवर होने पर हैपेटाइटिस और फाइब्रोसिस होने का खतरा रहता है। इससे लिवर डैमेज होता है। - प्रोफेसर अजय डुसेजा, हीप्टोलाजी डिपार्टमेंट पीजीआई