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World Food Day: चार फूड ब्लॉगर, जिन्होंने लजीज जायके के लिए कोना-कोना खाक छानी

Fri, 16 Oct 2020 11:18 AM IST
खुशबू गोयल आशीष वर्मा, चंडीगढ़
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मिजोरम जायका - फोटो : Pixabay
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रेस्टोरेंट व होटल की चकाचौंध देखकर लोग पहुंच तो जाते हैं, लेकिन जब स्वाद की बारी आती है तो वह चटकारा नहीं मिलता, जिसकी उम्मीद लगाए होते हैं। मूड तो खराब होता है साथ ही पैसे की भी बर्बादी होती है। अब कोई रेस्टोरेंट या स्ट्रीट फूड विक्रेता ये तो बताएगा नहीं कि उसका कौन सा व्यंजन अच्छा है और कौन सा नहीं।
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खाने-पीने के शौकीन लोगों की इस गंभीर समस्या का हल शहर के फूड ब्लागर्स के पास है। चंडीगढ़ के कई ऐसे फूडी हैं, जो ट्राइसिटी के जायके को मेहनत से खोजकर उसकी खूबियों और कमियों को शहरवासियों के सामने रखते हैं, ताकि स्वादहीन खाने पर लोगों का पैसा बर्बाद न जाए। सोशल मीडिया पर उनके लंबे फॉलोअर्स हैं, जो उनकी हर बात को फॉलो करते हैं। वर्ल्ड फूड डे के मौके पर जानते हैं शहर के फूड ब्लॉगर के बारे में।

पार्टी या रेस्टोरेंट में जाने से पहले लेते हैं सलाह

आशना गुगलानी और समीर गुप्ता दोनों मिलकर फूड ब्लॉगिंग करते हैं। ये दोनों सोशल मीडिया पर इतने ज्यादा फेमस हो चुके हैं कि कई लोग पार्टी या डिनर में जाने से पहले इनसे पूछते हैं कि उनके पाकेट के हिसाब से कहां पर स्वादिष्ट व लजीज खाना मिलेगा। आशना व समीर ने बताया कि स्टूडेंट लाइफ के दौरान जब उनके पास पॉकेट मनी कम होती थी तो वह बहुत ही सोच-समझकर किसी रेस्टोरेंट व होटल में खाना खाते थे। मन मुताबिक खाना नहीं मिलने पर उन्हें बहुत दुख होता था। उन्होंने महसूस किया कि उनकी तरह कई लोग होंगे, जो इस तरह की परेशानी झेलते होंगे।

इससे उन्हें फूड ब्लॉगिंग का आइडिया आया और सोशल मीडिया पर एक से बढ़कर एक जायके को ढूंढकर लाने लगे। आशना ने बताया कि उन्हें रेस्टोरेंट व होटलर व्यंजन के बारे में लिखने के लिए आमंत्रित करते हैं, लेकिन वे खुद कस्टमर बनकर जाना ज्यादा पसंद करती हैं। उनका कहना है कि वह अपने फॉलोअर्स के प्रति जिम्मेदार व ईमानदार हैं, इसलिए किसी के बुलावे पर जब वे किसी फूड का रिव्यू लिखती हैं तो अच्छे को अच्छा और बुरे को बुरा कहने से नहीं हिचकती। सोशल मीडिया पर उनके 23 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं।

चंडीगढ़ का कौन-सा जायका ढूंढा
आशना ने बताया कि एक चैनल का जब वे वीडियो शूट कर रही थी तो उन्हें इंडस्ट्रियल एरिया में पंजाबी रसोई नाम से एक शॉप मिली, जिसका सरसो का साग और मक्के की रोटी बहुत ही अव्वल दर्जे की है। घर का बना आचार व एक सब्जी बहुत ही जायकेदार है।

तीन साल में बन गए 13 हजार फॉलोअर्स

बचपन केशौक की वजह से गुरमेहर चंडीगढ़ के फेमस फूड ब्लॉगर बन गए हैं। वे तीन साल से चंडीगढ़ के जायकों के बारे में लिख रहे हैं और उनके 13 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स बन गए हैं। उन्होंने बताया कि बचपन से उन्हें खाने बनाने का शौक था। इंजीनियरिंग की डिग्र्री हासिल करने के बाद उन्होंने पहले अपने घर का बिजनेस का संभाला। उसके साथ फूड ब्लॉगिंग का काम करने लगे।

वे कहते हैं कि उनका एक ही मकसद है कि लोगों को अच्छा खाना ढूंढने के लिए मेहनत न करना पड़े। कई लोग ऐसे होते हैं कि अच्छा खाना खाने के लिए खूब पैसा खर्च कर देते हैं, फिर भी उनका दिल नहीं भरता। इसलिए वे अपने ब्लॉग पर शहर में मिलने वाले लजीज व्यंजनों के बारे में दिल खोलकर लिखते हैं। उन्होंने बताया कि इस सफर में उन्हें बहुत से अच्छे दोस्त मिले हैं और बहुत कुछ नया सीखने को मिला है।

कौन-सा जायका ढूंढा
गुरमेहर ने बताया कि सेक्टर-18 में एक होम बेकर हैं, जो चीज केक बहुत अच्छा बनाते हैं। ऑनलाइन मिलने के बाद उनके पास पहुंचे और उनका स्वाद चखा। स्वाद में चीज केक अव्वल था। इसके अलावा पंचकूला सेक्टर-7 के स्ट्रीट फूड को भी उन्होंने खूब फेमस किया है।

ब्लॉग पढ़ने के बाद लोगों के पैसे बर्बाद नहीं जाते

राहुल मिगलानी शहर के सबसे पुराने फूड ब्लॉगर हैं। वे साल 2014 से ट्राइसिटी के जायके को लोगों तक पहुंचाने में लगे हैं। वैसे तो उनका सेक्टर-35 में हैंडलूम का अपना काम है, लेकिन फूड ब्लॉगिंग करना उनका जुनून है। खाने के शौकीन हैं। ट्राइसिटी के नए-नए स्वाद को वे खोजकर लाते हैं और लोगों को बताते हैं। वे यह भी बताते हैं कि किस रेस्टोरेंट में जाने पर कौन सा फूड आर्डर करें। कौन सा न करें। राहुल की चंडीगढ़ में अपनी एक पहचान है, जो उनके काम से बनी है।

सिटी का ऐसा कोई होटल या रेस्टोरेंट नहीं है, जो उन्हें न जानता हो। सोशल मीडिया पर उनके 27 हजार से ज्यादा फालोअर्स हैं। वे बताते हैं कि ट्राइसिटी में बहुत अच्छा खाना मिलता है, लेकिन न तो लोगों को पता है और न ही कभी उसे प्रमोट किया गया है। उनकी ख्वाहिश है कि ट्राइसिटी की पहचान फूड हब के तौर पर मिले। वे कहते हैं कि जब किसी जायके की समीक्षा करते हैं तो पूरी सतर्कता और ईमानदारी के साथ, ताकि उनके फॉलोअर्स को वहां जाने पर कोई निराशा न हो।

कौन-सा जायका ढूंढा
राहुल ने बताया कि आज से दो साल पहले उन्हें किसी ने बताया कि मोहाली 3 बी टू में मुंबई स्टाइल में पाव भाजी मिलती है। जब वे वहां गए तो उसका स्वाद बिल्कुल मुंबई जैसा था। राहुल का दावा है कि पूरे ट्राइसिटी में इससे बढ़िया कहीं और पाव भाजी नहीं मिलेगी।
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अशविंदर जो जायका बताते हैं, उसे खूब पसंद किया जाता है

पेशे से सिविल इंजीनियर अशविंदर वधावन ने बहुत कम समय में इस क्षेत्र में अपना नाम कमा लिया है। ढाई साल में सोशल मीडिया में उनके दस हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। उन्होंने बताया कि जब वे सोशल मीडिया पर किसी जायके के बारे में बताते थे तो लोगों को बहुत पसंद आता था। फिर उन्होंने सोचा क्यों न इस बारे में लिखा जाए।

जब उन्होंने इसमें हाथ आजमाया तो उनके साथ कई बड़े ब्रांड जुड़ते चले गए। चिप्स बनाने वाली एक मल्टीनेशनल कंपनी ने उनका फोटो अपने पैकेट के साथ प्रकाशित किया। इंस्टाग्राम ने भी उन्हें अपने एक इवेंट में आमंत्रित किया। अशविंदर को भी रेस्टोरेंट व होटल मालिक अपने खाने-पाने की रिव्यू लिखने के लिए आमंत्रित करते हैं। खाने के बाद वे उसकी कमियां भी बताते हैं। कई बार वे कस्टमर बनकर जाते हैं। 

कौन-सा जायका ढूंढा
अशविंदर ने बताया कि अच्छे खाने की तलाश में वे खुड्डा लाहौरा पहुंच गए। वहां पर तिब्तियन किचन बना है, जो बिल्कुल उसी तरह से बना है जैसे हिमाचल में कैफे होते हैं। वहां के मोमोज व शेफाले बहुत अच्छे थे, लेकिन वहां कोई नहीं जाता। जब उसका रिव्यू लिखा तो लोगों को बहुत पसंद आया। ऐसी ही एक डिश पंचकूला सेक्टर-9 में बिकने वाली पाव भाजी वाले को खोजा था।
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