सेक्टर- 20 लेबर चौक पर काम मिलने की आस में बैठे मजदूर।
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कोरोना की सबसे ज्यादा मार दिहाड़ीदार मजदूरों पर पड़ी है। निर्माण कार्य बंद होने से काम नहीं मिल रहा है। महीने भर में आठ से 10 दिन काम मिल पा रहा है। मजदूर सुबह आठ बजे लेबर चौक पर पहुंच जाते हैं। सुबह 11 बजे तक काम नहीं मिला तो घर लौटना पड़ता है।
सेक्टर-20 लेबर चौक पर खड़े बिहार के दयानंद शर्मा ने बताया कि उनके दो बेटे हैं। बड़े बेटे ने बारहवीं फर्स्ट डिवीजन में पास किया। पैसा न होने की वजह से उसे आगे पढ़ा नहीं सकता, इसलिए काम के लिए गांव से बुला लिया लेकिन अब काम नहीं है। सात दिन से लेबर चौक से बिना काम के वापस जाते हैं।
बिहार के ही लखीसराय के रहने वाले माधो यादव कहते हैं कि लेबर चौक पर 150 लोगों में से सिर्फ 20 से 25 लोगों को ही काम मिलता है। लॉकडाउन से पहले ऐसा नहीं था। राज मिस्त्री दुखी प्रसाद कहते हैं कि इस महीने अब तक सिर्फ तीन दिन काम मिला है।
इंद्रजीत यादव ने बताया कि 15 दिन से काम की तलाश में आ रहे हैं लेकिन काम नहीं मिलने से लौट जाते हैं। सेक्टर-44 के लेबर चौक पर खड़े शंभू, चंदू, राम भरोसे, राम कृपाल, राधे श्याम और ओम प्रकाश सहित अन्य मजदूरों का कहना है कि लॉकडाउन से पहले 90 प्रतिशत लोगों को काम मिल जाता था। अब 10 प्रतिशत मजदूरों को ही काम मिलता है।
कई बार तो 200 से 300 रुपये में काम करना पड़ता है। गजेंद्र ने बताया कि उन्हें अपने घर से आए डेढ़ महीने हो चुके हैं लेकिन काम नहीं मिल रहा। हालत इतनी खराब है कि घर के लिए आवश्यक चीजें भी नहीं खरीद पा रहे। घर के किराये, खाने के इंतजाम के साथ कुछ पैसे बचाकर घर भेजना बहुत मुश्किल हो गया है। घर से फोन आता है कि पैसे नहीं भेजोगे तो खाना मुश्किल हो जाएगा। ऐसा सुनकर मन बहुत दुखी होता है, लेकिन क्या करें।